सपने



क्यों खो जाते हैं सपने ?

वास्तविकता के धरातल पर।

क्यों साथ नहीं देता है दिल ?

जीवन की कठिन डगर पर।

फिर ख्वाहिशों के बादल,

छा जाते हैं मन चंचल पर।

मुझको एक राह दिखी है,

कांटो भरे एक पथ पर।

उड़ जाऊं मैं नभ को छू लूं,

सोच लेती हूं पल भर।

सपने सच भी हो जायेंगे,

रुकना मत बस चलकर।


अर्चना त्यागी

जोधपुर, राजस्थान

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