कोरोना और ताऊ ते से तबाही की 6 खबरे



 ग्रामीण इलाकों को कोरोना से बचाने के लिए पीएम मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राज्यों और जिलों के फील्ड अधिकारियों के साथ सुबह 11 बजे कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर चर्चा कर रहे है। एक खबर के अनुसार, कर्नाटक, बिहार, असम, चंडीगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखंड, एमपी, गोवा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के अधिकारी इस बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में तेजी से फैल रहे ग्रामीण इलाकों में फैल रहे कोरोना को लेकर चर्चा हुआ। ग्रामीण इलाकों में टेस्टिंग को बढ़ाने जाने पर भी चर्चा हुई। ग्रामीम इलाकों में टेस्टिंग बढ़ाई जा सकती है।  कोरोना वायरस के मरीजों को अस्पताल में हर तरह की सुविधा मिले इसे लेकर भी प्लानिंग बनायी गयी है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान COVID19 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद है।कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने COVID19 महामारी से निपटने में राज्यों और जिलों के अधिकारियों के अनुभव के बारे में बताने के लिए पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई बातचीत में भाग लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पीएम मोदी के साथ बातचीत में, अधिकारी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड -19 के खिलाफ चल रही लड़ाई को जारी रखने के लिए सुझावों और सिफारिशों को साझा किया गया। आधिकारिक सूत्रों ने पहले बताया था कि इस बैठक में नौ राज्यों के 46 जिलों के जिलाधिकारी हिस्सा लिया। बता दें कि इन राज्यों के कई जिलों में कोरोना मामलों में भारी उछाल देखा गया है। आपको बता दें कि भारत में एक दिन में कोविड-19 के 2,63,533 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,52,28,996 हो गई। वहीं, 4,329 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 2,78,719 हो गई। भारत के कुल कोरोनावायरस के मामले मंगलवार को 25 मिलियन के आंकड़े को पार कर गए। पिछले 24 घंटों में कोविद -19 मामलों में सबसे अधिक योगदान देने वाले शीर्ष पांच राज्यों में 38,603 मामले कर्नाटक हैं, इसके बाद तमिलनाडु में 33,075 मामले, महाराष्ट्र में 26,616 मामले, केरल में 21,402 मामले और पश्चिम बंगाल में 19,003 मामले हैं।











नहीं थम रही कोरोना से मौतें! भारत में एक दिन में 4,329 लोगों ने तोड़ा दम, 2,63,533 नये मरीज

भारत में एक दिन में कोविड-19 के 2,63,533 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,52,28,996 हो गई। वहीं, 4,329 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 2,78,719 हो गई। भारत के कुल कोरोनावायरस के मामले मंगलवार को 25 मिलियन के आंकड़े को पार कर गए। पिछले 24 घंटों में कोविद -19 मामलों में सबसे अधिक योगदान देने वाले शीर्ष पांच राज्यों में 38,603 मामले कर्नाटक हैं, इसके बाद तमिलनाडु में 33,075 मामले, महाराष्ट्र में 26,616 मामले, केरल में 21,402 मामले और पश्चिम बंगाल में 19,003 मामले हैं। इन पांच राज्यों से लगभग 52.63 प्रतिशत नए मामले सामने आए हैं, जिनमें अकेले कर्नाटक 14.65 प्रतिशत नए मामलों के लिए जिम्मेदार है।  पिछले 24 घंटों में कुल 4,329 लोगों ने कोरोनावायरस से दम तोड़ दिया। सबसे अधिक मौतें महाराष्ट्र (1000) में हुईं, इसके बाद कर्नाटक में 476 दैनिक मौतें हुईं। महाराष्ट्र में ताजा मामलों में भारी गिरावट देखी गई है। महाराष्ट्र ने सोमवार को 24 घंटे की अवधि में 26,616 संक्रमणों के साथ कोविद -19 के नए मामलों में और गिरावट दर्ज की। साप्ताहिक सकारात्मकता दर में गिरावट का रुझान देखा गया है, जो 18.17 प्रतिशत है। पश्चिम बंगाल ने पिछले कुछ दिनों में सबसे अधिक मामले दर्ज करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में आंध्र प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।









कोरोना के इलाज में अब नहीं होगा प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल, जानिए क्या था खतरा!

नयी दिल्ली। सरकार ने सोमवार को कोविड-19 उपचार के लिए नैदानिक परामर्श में संशोधन किया और मरीजों के उपचार के लिए प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटा दिया। सरकार ने पाया कि कोविड-19 मरीजों के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों को कम करने में फायदेमंद साबित नहीं हुई। कोविड-19 के लिए गठित राष्ट्रीय कार्य बल-आईसीएमआर की पिछली सप्ताह हुई बैठक के दौरान सभी सदस्य प्लाज्मा थेरेपी को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटाने पर सहमत हुए थे, जिसके बाद सरकार का यह निर्णय सामने आया है।  प्लाज्मा थेरेपी को कोविड-19 मरीजों के उपचार में प्रभावी नहीं पाया गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अधिकारी ने कहा कि कार्य बल ने व्यस्क कोविड-19 मरीजों के लिए उपचार संबंधी नैदानिक परामर्श में संशोधन करते हुए प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया। उल्लेखनीय है कि कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन को देश में कोविड-19 उपचार के लिए प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग को तर्कहीन और गैर-वैज्ञानिक उपयोग करार देते हुए आगाह किया था।










महाराष्ट्र में चक्रवाती तूफान से छह की मौत, गुजरात में दो लाख लोगों को हटाया गया

मुंबई। भीषण चक्रवाती तूफान सोमवार रात में गुजरात के सौराष्ट्र तट से आ टकराया और इस दौरान हवा 185 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही है। इससे पहले, चक्रवात के कारण मुंबई में भारी वर्षा हुई और गुजरात में दो लाख से अधिक लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। वहीं, इसके चलते दो नौकाएं तट से दूर अरब सागर में चली गई हैं, जिन पर 410 लोग सवार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि चक्रवात के रात करीब 9:30 बजे टकराने के दौरान केंद्र शासित दीव में 133 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। विभाग ने कहा कि एक भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया ‘ताउते’ वर्तमान समय में गुजरात तट के पास स्थित है। आईएमडी ने कहा कि इसके टकराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और यह अगले दो घंटे जारी रहेगी। आईएमडी ने ट्वीट कर कहा कि चक्रवात का केंद्र अगले तीन घंटे में सौराष्ट्र तट को पार करते हुए पूर्वी दीव की तरफ बढ़ेगा। गुजरात मौसम केंद्र की सहायक निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि चक्रवात गुजरात तट से अगले दो घंटे के भीतर गुजर जाएगा। उन्होंने कहा कि चक्रवात ताउते गुजरात में पिछले 23 साल में टकराने वाला सबसे विनाशकारी चक्रवात है जोकि केंद्र शासित दीव और भावनगर जिले के महुवा शहर के बीच कहीं टकराएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने चक्रवात के टकराने की पुष्टि करते हुए गांधनगर में संवाददाताओं से कहा कि तटीय जिलों अमरेली, जूनागढ़, गिर-सोमनाथ और भावनगर में 150 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और ये जिले चक्रवात से सर्वाधिक प्रभावित होंगे। वहीं, महाराष्ट्र में अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में भीषण चक्रवाती तूफान से संबंधित अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई और दो नौकाओं के समुद्र में डूब जाने से तीन नाविक लापता हैं। तीन लोगों की मौत रायगढ़ जिले में हुईं, एक नाविक की मौत सिंधुदुर्ग जिले में और ठाणे जिले के नवी मुंबई और उल्हासनगर में दो लोगों की मौत उन पर पेड़ गिरने से हुई। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सिंधुदुर्ग जिले के आनंदवाड़ी बंदरगाह में लंगर डाले दो नौकायें डूब गई जिन पर सात नाविक सवार थे। जब चक्रवात महाराष्ट्र तट से आगे बढ़ा और सुबह मुंबई के करीब पहुंचा तो यहां स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक परिचालन स्थगित करने की घोषणा की और बाद में रात आठ बजे तक सभी परिचालन स्थगित रखने का फैसला किया। एक अधिकारी ने बताया कि गुजरात में निचले तटीय इलाकों से दो लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 54 टीमें तैनात की गई हैं। एक अधिकारी ने कहा कि चक्रवात ताउते गुजरात तट की ओर बढ़ने के मद्देनजर पोरबंदर सिविल अस्पताल के ऐसे कम से कम 17 कोविड​​-19 रोगियों को सोमवार को एहतियात के तौर पर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया जो वहां आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इस बीच, गुजरात में अहमदाबाद और सूरत समेत सभी प्रमुख हवाई अड्डोंमें बतौर सावधानी संचालन रोक कर दिया गया। गुजरात सरकार ने कहा कि केंद्र ने चक्रवात से निपटने के लिए गुजरात को हर संभव मदद की पेशकश की है और सेना, नौसेना और वायुसेना को जरूरत पड़ने पर प्रशासन की सहायता के लिए तैयार रहने को कहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने तटीय जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार के संपर्क में हैं और उन्होंने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने कहा कि प्रधानमंत्री ने रूपाणी को फोन किया और चक्रवात से निपटने के लिए राज्य सरकार की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। 9 जून, 1998 को गुजरात में आए एक बड़े चक्रवात से व्यापक क्षति हुई थी और बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हुई थीं, विशेष रूप से कांडला के बंदरगाह शहर में। वहीं आधिकारिक आंकड़ों ने तब मरने वालों की संख्या 1,173 बताई थी, जबकि 1,774 लापता हो गए थे। एक प्रमुख समाचार पत्रिका ने तब दावा किया था कि इसमें कम से कम 4,000 लोग मारे गए थे और अनगिनत लापता हो गए थे क्योंकि शव समुद्र में बह गए थे। भारतीय नौसेना ने सोमवार को मुंबई तट पर दो नौकाओं पर सवार 410 लोगों को बचाने के लिए संदेश मिलने के बाद अपने तीन अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को तैनात किया। इन दो नौकाओं की सहायता के लिए तैनात पोतों में आईएनएस कोलकाता, आईएनएस कोच्चि और आईएनएस तलवार शामिल हैं। नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मढवाल ने कहा, ‘‘बॉम्बे हाई इलाके में हीरा ऑयल फील्ड्स तट से नौका ‘पी 305’ के दूर जाने की सूचना मिलने पर आईएनएस कोच्चि को बचाव एवं तलाश अभियान के लिए रवाना किया गया। नौका पर 273 लोग सवार थे।’’ ऑयल फील्ड मुंबई से करीब 70 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में है। नौसेना के अधिकारी ने बताया, ‘‘मुंबई से आठ समुद्री मील की दूरी पर स्थित नौका ‘जीएएल कंस्ट्रक्टर’ से एक अन्य त्राहिमाम संदेश मिला जिस पर 137 व्यक्ति सवार हैं। इसके बाद आईएनएस कोलकाता को सहायता के लिए भेजा गया है।’’ मुंबई में नौसेना के एक प्रवक्ता ने रात में कहा कि खराब मौसम के बीच बजरा 305 पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि उसने 16 मई की रात को चक्रवात के कारण अशांत समुद्र के बीच कोच्चि तट से लगभग 35 समुद्री मील दूर फंसे 12 मछुआरों को बचाया। चक्रवात ताउते के उत्तर में गुजरात की ओर बढ़ने के साथ ही महाराष्ट्र और गोवा के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने के साथ ही भारी वर्षा और समुद्र में ऊंची लहरें उठी। निकाय अधिकारियों ने बताया कि मुंबई में सोमवार दोपहर में 114 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, क्योंकि चक्रवाती तूफान मुंबई तट के करीब से गुजरा। आईएमडी मुंबई की वरिष्ठ निदेशक शुभांगी भूटे ने कहा कि दोपहर में कोलाबा वेधशाला में हवा की गति सबसे अधिक 108 किमी प्रति घंटे दर्ज की गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को चक्रवाती तूफान के मद्देनजर मुंबई, ठाणे और राज्य के अन्य तटीय जिलों के हालात का जायजा लिया। मुंबई में भारी बारिश जारी रही, इसके मद्देनजर 12,000 से अधिक नागरिकों को तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। इनमें रायगढ़ जिले के 8,380, रत्नागिरि के 3,896 और सिंधुदुर्ग जिले के 144 लोग शामिल हैं। सोमवार सुबह जब मुंबई वासी नींद से उठे तो उन्होंने तेज हवाएं और भारी बारिश देखी जो चक्रवात के कारण था। मुंबई के कई लोग कोरोना वायरस महामारी के बीच मौसम में बदलाव का आनंद ले रहे हैं। उधर, कर्नाटक में चक्रवात ताउते की वजह से प्रभावित तटीय और मलनाड जिले में आठ लोगों की मौत हो गई। कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से स्थिति को लेकर जारी रिपोर्ट में बताया गया कि आज सुबह तक 121 गांव और तालुका चक्रवात से प्रभावित हैं। बयान में बताया गया कि 547 लोगों को अब तक उनके संबंधित स्थानों से निकाला गया है और चक्रवात से लोगों को बचाने के लिए यहां खोले गए 13 राहत शिविरों में 290 लोग शरण लिए हुए हैं।

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ब्रह्ममुहूर्त में बाबा के जयकारों के साथ खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, कोविड गाइडलाइन का हुआ पालन

देहरादून। उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय स्थित बदरीनाथ के कपाट शीतकाल में छह माह बंद रहने के बाद मंगलवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में खोल दिए गए। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते अन्य धामों की तरह बदरीनाथ के कपाट खोले जाने के दौरान भी श्रद्धालुओं को उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी गई। पूरे विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मेष लग्न पुष्य नक्षत्र में प्रात: सवा चार बजे भगवान बदरीविशाल के पट खोल दिए गए। इस दौरान तीर्थ पुरोहित, प्रशासनिक अधिकारियों समेत वहां उपस्थित कुछ ही लोग प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति के गवाह बन पाए। मुख्य पुजारी रावल ईश्वरीप्रसाद नंबूदरी ने गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी को उनकी गद्दी पर विराजमान किया। इसके बाद अन्य देवताओं को मंदिर गर्भगृह में विराजमान किया गया। इस दौरान मंदिर को करीब बीस क्विंटल फूलों से सजाया गया था। कपाट खुलने के दौरान मास्क पहनने और सामाजिक दूरी रखने जैसे नियमों का पूरा पालन किया गया। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रथम महाभिषेक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से किया गया और भगवान से जनकल्याण एवं आरोग्यता की कामना की गई। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बदरीनाथ के कपाट खुलने पर सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी तथा आग्रह किया कि वे अपने घरों में रहकर पूजा पाठ करें। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कपाट खुलने पर प्रसन्नता जताई कहा कि कोरोना वायरस की समाप्ति के बाद चारधाम यात्रा पुन: शुरू होगी। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कहा कि फिलहाल चारधाम यात्रा की अनुमति नहीं है लेकिन स्थितियां सामान्य होने पर यात्रा को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। बदरीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही सभी चारों धामों के कपाट खुल गए हैं। इससे पहले 17 मई को केदारनाथ के कपाट खुले थे जबकि 14 मई को यमुनोत्री और 15 मई को गंगोत्री के कपाट खोले गए थे। गढ़वाल हिमालय के चारधामों के नाम से मशहूर इन धामों के कपाट हर साल सर्दियों में छह माह बंद रहने के बाद अप्रैल-मई में श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। गढ़वाल की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाली चारधाम यात्रा पर भी कोविड-19 का साया पड़ गया है। पिछले साल नियत समय से देर से शुरू हुई चारधाम यात्रा को इस बार भी संक्रमण के मामलों में वृद्धि होने के चलते फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। चारधाम यात्रा को स्थगित करने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि धामों के कपाट अपने नियत समय पर ही खुलेंगे लेकिन वहां केवल तीर्थ पुरोहित ही नियमित पूजा करेंगे।











नौसेना ने चक्रवाती तूफान ताउते में फंसे बजरे पर सवार 146 लोगों को बचाया, अन्य की तलाश जारी

मुंबई। भारतीय नौसेना ने अरब सागर में आए चक्रवातीय तूफान ‘ताउते’ के कारण समु्द्र में अनियंत्रित होकर बहे एक बजरे पर सवार 146 लोगों को बचा लिया है और बाकियों की तलाश अभी जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि नौसेना ने बचाव कार्य के लिए मंगलवार सुबह पी-81 को तैनात किया था। यह खोज एवं बचाव कार्यों के लिए नौसेना का एक बहुमिशन समुद्री गश्ती विमान है। इससे पहले, सोमवार को निर्माण कम्पनी ‘एफकान्स’ के बंबई हाई तेल क्षेत्र में अपतटीय उत्खनन के लिए तैनात दो बजरे लंगर से खिसक गए और वे समुद्र में अनियंत्रित होकर बहने लगे थे, जिसकी जानकारी मिलने के बाद नौसेना ने तीन फ्रंटलाइन युद्धपोत तैनात किए थे। इन दो बजरे पर 410 लोग सवार थे। इन दो बजरे की मदद के लिए आईएनएस कोलकाता, आईएनएस कोच्चि और आईएनएस तलवार को तैनात किया गया था। नौसेना के एक प्रवक्ता ने मंगलवार सुबह कहा, ‘‘ समुद्र में बजरे पी305 से बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति में कुल 146 लोगों को बचाया गया है..’’ उन्होंने बताया कि अन्य लोगों को बचाने के लिए खोज एवं बचाव (एसएआर) अभियान पूरी रात जारी था। उन्होंने कहा, ‘‘ वहीं, एक अन्य घटना में आईएनएस कोलकाता ने पोत वर प्रभा के ‘लाइफ राफ्ट’ से भी दो लोगों को बचाया और पी305 के चालक दल के सदस्यों को बचाने के लिए आइएनएस कोच्चि के साथ खोज एवं बचाव कार्य में जुट गया।

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