आगरा में कोरोना से अब तक 256 संक्रमितों की मौत हुई है। हालांकि यह दावा कागजी है। मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक हैं, जो दस्तावेजों में नहीं दर्ज ही नहीं है। लोगों का कहना है कि आगरा में कोरोना से हो रही मौतों का सच ताजमहल से 100 मीटर की दूर स्थित श्मशान से उठ रहा धुआं दे रहा है। यहां एक माह से हर दिन औसतन 100 शवों के अंतिम संस्कार हो रहे हैं। चिताओं से उठता धुआं इस कदर फैला हुआ है कि ताजमहल की तस्वीर अब धुंधली नजर आती है। प्रशासन ने शवों के बढ़ते बोझ के चलते 24 घंटे अंतिम संस्कार की अनुमति दे रखी है। लोगों को 24 घंटे बाद दाह संस्कार का टोकन मिल रहा है। जबकि 20 मार्च तक यहां महज 15 से 20 शव अंतिम संस्कार के लिए लाए जाते थे।
आगरा में अब तक 22,513 संक्रमित केस मिले हैं। इनमें से 3050 एक्टिव केस हैं। जबकि 19,207 ठीक हो चुके हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। श्मशान घाटों पर घंटों की लाइन लग रही है। तब कहीं चिता के लिए कुछ समय के लिए जगह मिल पा रही है। ताजगंज मोक्षधाम पर विद्युत शवदाह गृह पर रोजाना 30 से ज्यादा टोकन आ रहे हैं। क्षेत्र बजाजा की रसीदों के हिसाब से रोजाना 100 के लगभग अंतिम संस्कार का सामान लिया जा रहा है।
बीते कुछ दिनों से विद्युत शवदाह गृह की दो भट्टियां भी खराब हैं। ऐसे में लकड़ियों पर शव जलाने की संख्या में और इजाफा हुआ है। ब से निकल रहे धुएं के चलते मेहताबबाग, ग्यारह सीढ़ी और हाथी घाट आदि जगहों से ताजमहल धुंधला दिखाई दे रहा है।
पूर्व में श्मशान घाट स्थानांतरित करने के हुए थे प्रयास
साल 2014-15 के लगभग तत्कालीन कमिश्नर प्रदीप भटनागर द्वारा ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए श्मशान घाट को स्थानांतरित करने के प्रयास हुए थे परंतु जनता के विरोध और विधिक कारणों से ऐसा नहीं हो पाया था और धुआं ताज तक न पहुंचने देने के लिए वहां दो चिमनियों को लगाया गया था।
नगर निगम भी कर रहा प्रयास
ताजगंज मोक्षधाम की भीड़ को कम करने और इकलौते विद्युत शवदाह गृह पर बढ़ते भार को कम करने के लिए मेयर नवीन जैन और नगरायुक्त टीकाराम ने शासन को आगरा के चार अन्य श्मशान घाटों पर विद्युत शवदाह गृह के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
कोरोना बम बन गए हैं श्मशान घाट
आगरा के तमाम श्मशान घाट इस समय कोरोना बम बन गए हैं। जगह जगह लोग पीपीई किट फेंक कर जा रहे हैं और उन्हें हटाने वाला कोई नहीं है। चिताओं के जलने के बाद अस्थियां लेने आने वालों की संख्या न के बराबर होने के कारण भी काफी परेशानी हुई है।
आगरा में उपले जलाने पर भी रोक
ताजमहल के कारण आगरा में उपले जलाने पर भी रोक है। सजा का प्रावधान है। शहर में धुएं वाले जनरेटर प्रतिबंधित हैं और ताज को नुकसान न हो इसलिए तमाम उद्योग धंधों पर भी रोक है। ताजमहल के आस पास पेट्रोल की गाड़ी तक नहीं चलाई जा सकती है, सिर्फ बैट्री या स्वचालित वाहन ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

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