आर्यभट्ट प्रेक्षण शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ सौर विज्ञानी डा. वहाबउद्दीन ने बताया कि सूर्य के दक्षिण में एक बड़ा सन स्पाट बना हुआ है, जो लगातार सक्रिय है। इसकी दिशा पृथ्वी की ओर है। इस सन स्पाट के चुंबकीय क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। इस वजह से इसमें बड़ी ज्वाला बन सकती है, जो एक्स श्रेणी की हो सकती है। इनसे निकले सौर तूफानों का असर आने वाले दिनों में पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। जिनसे रंग बिरंगी रोशनी नजर आएंगी लेकिन संभावित एक्स क्लास की फ्लेयर खतरनाक हो सकती है।

सेटलाइट व उड़ान सिग्‍नल पर पड़ सकता है असर

संभावित एक्स क्लास की फ्लेयर से हाई चार्ज पार्टिकल निकलेंगे। जिस कारण बड़े सौर तूफान बनने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। ये सेटेलाइट के संचालन में बाधा पहुंचा सकते हैं। हवाई उड़ानों के सिग्नल को प्रभावित कर सकते हैं। यदि एक्स क्लास की फ्लेयर हुई तो इसके प्रभाव से बचने की व्यवस्था कर ली जाएगी। नुकसान से बचने के सभी उपाय पहले से मौजूद हैं। फिलहाल सूर्य में अभी चार सन स्पाट ग्रुप बने हुए हैं। जिनपर विज्ञानी नजर रखे हुए हैं। डॉ. वहाबउद्दीन का मानना है कि सूर्य सर्वाधिक सक्रिय 2024 तक हो पाएगा।

सौर ज्वाला की तीन श्रेणियां

सूर्य से निकलने वाली ज्वालाओं की तीन श्रेणी होती है। सबसे अधिक खतरनाक व बड़ी एक्स क्लास है। यह सेटेलाइट और हवाई जहाज के सिग्नलों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। एम श्रेणी की ज्वाला की तीव्रता अपेक्षाकृत मध्यम और सी क्लास की फ्लेयर सबसे छोटी होती है। इनमें से किसी भी दिशा पृथ्वी की ओर यानी अर्थ डायरेक्ट होती है तो वह अपनी श्रेणी के हिसाब से खतरनाक साबित होती है।

क्या है सोलर फ्लेयर

सोलर फ्लेयर्स को सौर तूफान या कोरोनल मास इजेक्शन भी कहा जाता है। कई बार सनस्पॉट का आकार 50 हजार किलोमीटर के व्यास का भी होता है। ऐसे में इसके अंदर से सूर्य के गर्म प्लाज्मा का बुलबुला भी निकलता है। इस बुलबुले के विस्फोट से सोलर फ्लेयर्स निकलते हैं।