जयपुर। राजधानी में पार्कों के रखरखाव और नए पौधों को लगाने के नाम पर पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसके बाद भी हालातों में कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा है। बड़े पार्कों को छोड़ दें तो अधिकतर की स्थिति खराब है। पिछले पांच साल में जेडीए और नगर निगम पौधों पर 150 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुके हैं, फिर भी पार्कों में बदहाली कायम है। जबकि, उद्यान शाखा के अधिकारियों का दावा है कि 60 से 80 फीसदी पौधे लग जाते हैं। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि निगम की ओर से पौधारोपण के नाम पर खानापूर्ति ही की जा रही है। हालांकि, जेडीए की ओर से व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है।
मौजूदा स्थिति यह है कि पार्कों से लेकर डिवाइडर पर लगे पौधों की छटाई तक नहीं की जा रही है। संवेदक बारिश के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि, नियमों में महीने में दो बार छटाई का प्रावधान है। यही वजह है शहर के वीवीआईपी मार्गों से लेकर अन्य रास्तों में डिवाइडर पर पौधे बड़े हो गए हैं और हादसे की संभावना बनी रहती है।
ऐसे खर्च कर रहे पौधों में बजट
-02 बार खाद डालने का प्रावधान है वर्ष में पेड़-पौधों में
-4.76 लाख रुपए प्रति हैक्टेयर प्रति माह पार्कों रख रखाव पर खर्च करता है निगम
-4.51 करोड़ रुपए सालाना पानी डालने में खर्च करता है हैरिटेज नगर निगम
-05 करोड़ रुपए पौधे खरीदने में खर्च करता है मानसून के दौरान नगर निगम
-06 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं जेडीए ने पिछले पांच वर्षों में पौधारोपण पर
बरसात में ऐसे लगाते हैं पौधे
निगम: 80 हजार से एक लाख पौधे पार्षदों के माध्यम से लगवाता है। फिलहाल 150 पौधे प्रति पार्षद को निगम उपलब्ध करवा रहा है।
जेडीए: 60 हजार पौधे का लक्ष्य रहता है। कुछ पौधे लोगों को रियायती दर पर उपलब्ध करवाता है। कुछ पौधे सरकारी कार्यालयों में लगवाए जाते हैं। जो बचते हैं उनको सड़क किनारे, डिवाइडर आदि जगहों पर लगाते हैं।
किसने कितना किया खर्च
वर्ष जेडीए निगम
15-16 24.21 14.92
16-17 21.75 09.31
17-18 12.46 03.88
18-19 09.38 17.28
19-20 05.84 28.14
पिछले पांच वर्षों में जेडीए और निगम की ओर से पौधारोपण किया गया खर्चा है।
अब दौरे से कुछ आस
ग्रेटर नगर निगम उद्यान समिति की अध्यक्ष राखी राठौड़ नियमित रूप से पार्कों का दौरा कर रही हैं। वे क्षेत्रीय पार्षद को साथ लेकर पार्कों की स्थिति को देखती हैं। उनका कहना है कि पहला निरीक्षण है। अभियान शुरू करने से पहले उद्यान शाखा के अधिकारियों और संवेदकों के साथ बैठक कर साफ निर्देश दे दिए थे कि व्यवस्थाएं सुधार लें। निरीक्षण में कुछ खामियां भी मिल रही हैं। पार्षदों की शिकायतों भी हैं। इन सभी को जल्द दूर करवाया जाएगा।
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