जयपुर। राजधानी जयपुर में ड्रेनेज और सीवेरज सिस्टम का बुरा हाल है। शुक्रवार को तेज बारिश के बाद जिम्मेदार विभागों की कलई खुलकर सामने आ गई। वीवीआईपी क्षेत्रों में पानी भरा और देर रात तक जाकर स्थिति सामान्य हुई। इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए जिम्मेदार विभाग जिनमें जेडीए, नगर निगम और राजस्थान आवासन मंडल शामिल हैं। कभी गंभीरता से काम ही नहीं किया। यही वजह है कि हर साल मानसून में सड़कें खराब होती हैं। लोग घायल होते हैं और कुछ की तो मौत तक हो जाती है, लेकिन जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता। पानी की निकासी न होने से सड़कों का बुरा हाल हो जाता है। फिर इनको सही करने के नाम पर जेडीए—निगम 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर डालते हैं। जर्जर सीवरेज लाइन को सही करने का कोई प्लान भी निगम के पास नहीं है। छह हजार किमी में से तीन हजार किमी की सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त है। हैरिटेज नगर निगम सीमा क्षेत्र में बुरा हाल है।
दरअसल, राजधानी में जर्जर सीवरेज लाइन के अलावा ड्रेनेज सिस्टम को समय रहते विकसित नहीं किया गया। तभी तो ड्रेनेज का मास्टरप्लान करीब पांच वर्ष पहले तैयार किया गया, लेकिन उसके लागू करने की गति बेहद धीमी है। इस प्रोजेक्ट पर गौर करें तो करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होने हैं, लेकिन अब तक काम सिर्फ 50 करोड़ रुपए के ही शुरू हुए हैं।
ऐसे होना था काम
—2014—15 में एक कंसल्टेंट फर्म से जेडीए ने सर्वे करवाया था।
—800 किमी के आस—पास निगम सीमा क्षेत्र में बिछाई जानी थी लाइन
—900 किमी सीवरेज लाइन जेडीए के सीमा क्षेत्र में बिछाई जानी थी
करतारपुरा: बातों में ही निकल गए दो वर्ष
11.4 किमी लम्बे करतापुरा नाले का एक हिस्सा कच्चा है। 22 गोदाम औद्योगिक क्षेत्र से शांति नगर, मानसरोवर तक इसको पक्का करने की बात दो वर्षों से चल रही है। लेकिन, अब तक पैसा कहां से आएगा इस पर सहमति नहीं बन पाई है। इसको पक्का करने में 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। स्मार्ट सिटी से बजट दिए जाने की बात कही जा रही थी, लेकिन उसने मना कर दिया। जेडीए अधिकारियों की मानें तो अब तक नाले के अलाइनमेंट पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। बजट की दिक्कत नहीं है।
फोटो————जेडीए की ओर से बजरी मंडी रोड का निर्माण किया जा रहा है। पहले से करीब एक फुट ऊंची कर दी। इससे मुख्य सड़क पर बने घर और दुकानें नीची हो गईं।
पीआरएन: 1000 से अधिक कॉलोनियों में पानी निकासी की व्यवस्था ही नहीं
पृथ्वीराज नगर में 1000 से अधिक कॉलोनियां हैं। अब तक पानी निकासी का कोई इंतजाम नहीं हो पाया है। जबकि 1400 करोड़ रुपए अब तक नियमन शिविरों से जेडीए को मिल चुके हैं।
आगे क्या: जेडीए 730 करोड़ रुपए की योजना बना चुका है। हाल ही में पीआरएन, दक्षिण के लिए 14 करोड़ रुपए की कार्यादेश जारी कर दिया है। जल्द ही काम शुरू होगा।
वर्जन———
निगम सीमा क्षेत्र में सीवेरज की लाइनें जर्जर हैं। पहले कंडीशनल असिसमेंट सर्वे को लेकर भी चर्चा हुई थी, लेकिन वो बहुत खर्चीला प्रोजेक्ट है। कुछ क्षेत्रों में सीवरेज लाइन बदलने का काम शुरू किया गया है। जो सीवरेज लाइन जर्जर हैं, उनको बदलने का काम एक—एककर शुरू किया जाएगा।
—अवधेश मीणा, आयुक्त, हैरिटेज नगर निगम
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