जयपुर। इंटरनेट सेवा प्रदाता कम्पनी एसीटी के प्रतिनिधियों से नगर निगम के जुर्माने को सही माना था, लेकिन जमा करने में आनाकानी करते रहे। इसी बीच कोर्ट तक का रास्ता तय कर लिया। कोर्ट से राहत नहीं मिली और एक करोड़ रुपए निगम कोष में जमा करने के निर्देश दिए। यही वजह है कि अब कोर्ट के बाद कम्पनी ने स्वायत्त शासन विभाग का दरवाजा खटखटाया है। निगम से लेकर स्वायत्त शासन विभाग के कुछ आला अधिकारी कम्पनी की ही मदद कर रहे हैं।
दरअसल, बकाया जमा न करने की वजह से नगर निगम ने एक निजी बैंक को कम्पनी का खाता कुर्क करने को लिखा। इसके अलावा कम्पनी के ऑफिस पर नोटिस भी चस्पा कर दिया था।
पहली बार सहयोग, फिर असहयोग
खुद कम्पनी के प्रतिनिधियों की जुर्माना राशि की आपत्ति पर आयुक्त ने कमेटी का गठन किया था। कम्पनी के पत्र में लिखा था कि जो जुर्माना लगाया गया है, वह सही नहीं है। इसी जांच करवाई जाए। आयुक्त ने इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया। विज्ञापन और विद्युत शाखा के सहायक अभियंता, लाइसेंस शाखा के कनिष्ठ अभियंता और कनिष्ठ लेखाकार के अलावा एसीटी कम्पनी के तकनीकी प्रमुख अश्विनी कुमार वर्मा को शामिल किया। जब टीम ने निरीक्षण किया तो एसीटी से दो लोग शामिल हुए। फर्द रिपोर्ट में अश्विनी के अलावा पुष्पेंद्र चौधरी के भी हस्ताक्षर हैं। दूसरी जांच रिपोर्ट में कम्पनी के प्रतिनिधियों ने कोई सहयोग नहीं किया।
निगम ये लेता है किराया
प्रति पोल- 1500 रुपए
यूटिलिटी बॉक्स- 1000 रुपए
लाइन के- 1000 रुपए प्रति किमी
-ये किराया प्रति वर्ष का है।
एक किमी तक दो ही पोल
शहर में कई जगह ऐसी हैं, जहां कम्पनी ने एक से डेढ़ किमी के बीच लाइन बिछाने के लिए दो ही पोल पर लाइन बिछाने की बात कही है। जब टीम मौके पर निरीक्षण करने गई तो मौके पर 18 से 20 पोल मिले।
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