भवनेश गुप्ता
जयपुर। देश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का पुनर्गठन होगा। इसके लिए तय किए गए मापदंडों के अनुसार दिल्ली के केन्द्र बिन्दु से 100 किलोमीटर की परिधि और इस परिधि में किसी तहसील का 50 प्रतिशत या इससे अधिक क्षेत्र को शामिल किया जाएगा। इन मापदंड के तहत अलवर व भरतपुर जिले का बड़ा हिस्सा बाहर हो जाएगा। दोनों जिलों के मोटे तौर पर ग्रामीण इलाके बाहर होंगे। वर्तमान में हरियाणा का करीब आधा हिस्सा है एनसीआर में शामिल है और उसका भी हिस्सा बाहर होगा। बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार भी यही चाह रही है। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली में नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) प्लानिंग बोर्ड की हुई बैठक में यह स्थिति सामने आई।
इस पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने केन्द्र सरकार पर हरियाणा के प्रभाव में राजस्थान के साथ भेदभाव का बड़ा आरोप लगाया है। वीसी से जुड़े धारीवाल एनसीआर में शामिल भरतपुर व अलवर के हिस्से को कम करने के मुद्दे पर जमकर बोले। उन्होंने कहा कि हरियाणा के प्रभाव में आकर राजस्थान का इलाका कम करना न्यायोचित नहीं हैं। धारीवाल के नाराजगी भरे इस अंदाज को देखते हुए मीटिंग में शामिल अफसरों ने आश्वस्त करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके और अपनी पूरी बात रखी। बैठक में हरियाणा, उत्तरप्रदेश, चंडीगढ़ के भी जनप्रतिनिधी एवं अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़े।
पुनर्गठन में यह भी
मौजूदा क्षेत्र के जिन शहरी इलाकों के मास्टरप्लान बन चुके हैं, वे भी एनसीआर में शामिल होंगे। ऐसे नेशनल राजमार्ग और राज्य राजमार्ग (जो वर्तमान में जितनी लंबाई तक क्षेत्र में शामिल हैं), उस लंबाई तक दोनों तरफ 1-1 किमी का इलाका शामिल होगा।
धारीवाल बरसने वाले अंदाज में बोले
-भरतपुर को वर्ष 2015 में ही एनसीआर में शामिल किया गया, इतने से समय में भरतपुर को कुछ भी फायाद नहीं मिला है। भरतपुर के हिस्से को एनसीआर से हटाने का कोई औचित्य ही नहीं हैं।
-पिछली बैठक में भी हमारा यही एतराज था, प्रदेश के साथ भेदभाव नहीं हो। एक राज्य के हित की बजाय एनसीआर क्षेत्र का समन्वित विकास किया जाए।
-एनसीआर क्षेत्रों के विकास के लिए बजट बढ़ाकर दिया जाए। जो भी परिवर्तन हो वह बोर्ड बैठक में ही अनुमोदन करवाकर किया जाए।
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