जयपुर। राजस्थान में कोयले का संकट फिर से खड़ा हो गया है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती शुरू हो गई है और पिछले 24 घंटें के भीतर सैकड़ों गांवों में कई-कई घंटे बिजली गुल हो चुकी है। कोयले का संकट बढ़ा तो ग्रामीण इलाकों में त्योहार पर बिजली कटौती की तलवार लटकेगी और ग्रामीण परेशान होते रहेंगे। बिजली कम्पनियों के आला अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान में कोयला संकट की आहट के चलते 2500 हजार मेगावट के प्लांट बंद करने पड़े हैं। कुछ प्लांट में दो दिन तो कुछ में 4 से 6 दिन का कोयला ही बचा है। उधर, देशभर में कोयले का संकट खड़ा होने को है, ऐसे में राजस्थान के अधिकारियों की सांसे फूल रही हैं।
राजस्थान में कोरोना की मार धीमी होने के बाद माना जा रहा है कि आगामी त्योहार पर प्रदेश जगमगाएगा, लेकिन कोयला संकट अब अरमानों पर पानी फेर सकता है। अगले सप्ताह से नवरात्र के साथ ही त्योहारी सीजन भी शुरू हो जाएगा और बिजली की मांग में इजाफा तय माना जा रहा है। लेकिन कोयला संकट के चलते त्योहारी सीजन पर असर दिखाई दे सकता है। विद्युत वितरण निगमों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती जैसी कोई कार्रवाई नहीं जा रही है। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि जमकर कटौती हो रही है। उनका कहना है कि मंगलवार को ग्रामीण इलाकों में 6 से 7 घंटे तक बिजली कटौती की गई और बुधवार को सवेरे से ढाई घंटे की कटौती हो चुकी है। निगम अधिकारयों का तर्क है कि राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में फिलहाल एक-एक घंटे की कटौती शुरू की गई है।
यह बताई जा रही हैं वजह
देश में कोयला संकट को लेकर ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि कोयले का उत्पादन और उसके आयात में आ रही परेशानी ही संकट की सबसे बड़ी वजह है। उधर, मानसून के चलते कोयला उत्पादन में कमी आई है। अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश के कारण खदानों में पानी भर जाने की वजह से कोयले की निकासी नहीं हो पा रही है। देश के जिन बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक कम रह गया है वहां उत्पादन घटा दिया गया है ताकि इकाइयां पूरी तरह बंद करने की नौबत न आए।
बढ़ गई कोयले की कीमत
राजस्थान में दो माह पूर्व भी कोयले की कमी से हाहाकार मचा था और उस दौरान बिजली घरों में मात्र एक दिन का कोयला रहने पर ग्रामीण इलाकों में कटौती करनी पड़ी थी। उस समय एक्सचेंज से महंगे दामों में बिजली खरीदना मजबूरी बन गया था। वैसे ही हालात अब बन रहे हैं। विद्युत विभाग के जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कोयले की कीमतें बढ़ी हैं और ट्रांसपोर्टेशन में काफी रुकावटें आई हैं। इस समस्या के चलते राजस्थान ही नहीं कुछ दिनों के भीतर देश में कई जगह बिजली संकट पैदा हो सकता है।
कोरोना काल भी बना वजह
बिजली संकट के पीछे एक वजह कोरोना काल भी बताई जा रही है। देशभर में दफ्कतर बंद रहने के दौरान लोगों ने घरों से काम किया और उस दौरान बिजली का जमकर इस्तेमाल किया गया था। देश की बात करें तो ऊर्जा मंत्रालय के एक आंकड़े के मुताबिक 2019 में अगस्त-सितंबर महीने में बिजली की कुल खपत 10 हजार 660 करोड़ यूनिट प्रति महीना थी। यह आंकड़ा 2021 में बढ़कर 12 हजार 420 करोड़ यूनिट प्रति महीने तक पहुंच गया है।
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