Sharadiya Navratri 2021 घर—घर हुई घट स्थापना, पूजा—अर्चना
— आमेर शिला माता मंदिर में दर्शनार्थियों का प्रवेश रहा बंद
जयपुर। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर गुरुवार को शारदीय नवरात्र (Sharadiya Navratri 2021) शुरू हुए। घर—घर, मंदिर—मंदिर घट स्थापना की गई। मंदिरों और घरों में दुर्गा सप्तशति और रामायण पाठ शुरू हुए। माता की ज्योत जलाई गई। आमेर शिला माता मंदिर (Amer Shila Mata Temple) इस बार भी कोविड के चलते दर्शनार्थियों के लिए बंद रहा। शहर के अन्य दुर्गामाता मंदिरों में भक्तों ने कोविड गाइडलाइड लाइन की पालना करते हुए दर्शन किए।
नवरात्र के पहले दिन मंदिरों और घरों में घट स्थापना के बाद मातारानी को चौकी पर विराजमान कर सोडशोपचार पूजन किया गया। ज्योत जलाई गई। रामचरितमानस के नवाह्न पारायण पाठ शुरू हुए। आमेर के शिला माता मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना कर मंदिर के पुजारियों ने शिलामाता की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालु इस बार भी मातारानी के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाए। कुछ दर्शनार्थी मंदिर पहुंचे, लेकिन बाहर से ही माता रानी के दर पर ढोक लगाई। वहीं पुरानी बस्ती स्थित रुद्र घंटेश्वरी, घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर, झालाना डूंगरी स्थित देवी मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
मनसा माता का किया मोर पंख से विशेष श्रृंगार
कनक घाटी स्थित गोविंद देवजी ठिकाने के मनसा माता मंदिर में मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने घट स्थापना के बाद नक्षत्र पूजा की। शारदीय दुर्गा देवी की कल्पारंभ विहित पूजा के बाद चंडी पाठ, श्रृंगार, आरती और पुष्पाजंलि की गई। इस मौके पर मनसा माता का मोर पंख से विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने सड़क पर खुल रहे झरोखे से माता रानी के दर्शन किए। यहां प्रतिदिन सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक और शाम साढ़े पांच से साढ़े सात बजे तक दर्शन कर होंगे।
प्राचीन दुर्गामाता मंदिर में ब्रह्ममुहूर्त में घटस्थापना
दुर्गापुरा स्थित प्राचीन दुर्गामाता मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में घट स्थापना की गई। इससे पहले दीप प्रज्वलन किया गया। माता रानी को आरी तारी, गोटा चुनरी की पोशाक धारण करवाई गई। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने 20 फीट दूरी से माता के दर्शन किए। मंदिर महंत महेन्द्र भट्टाचार्य ने बताया कि सुबह 6 से दोपहर 12 बजे और शाम 5 से रात 8.30 बजे तक श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। प्रसाद माला नहीं चढ़ा सकेंगे।
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