जयपुर। जोधपुर हाईकोर्ट में लगी याचिका की भनक लगते ही राज्य सरकार ने सुविधा क्षेत्र से जुड़े मामले में भी यू—टर्न ले लिया। भूखंडधारियों से फेसेलिटी सेस वसूलने से लेकर निर्धारित से कम सुविधा क्षेत्र वाली कॉलोनियों में पट्टे देने के आदेश वापिस ले लिए। जिन कॉलोनियों में सुविधा क्षेत्र कम होगा, वहां मौजूदा भूखंडों में से जमीन लेकर उसकी पूर्ति की जाएगी। ऐसा नहीं होता है तो वहां पट्टे नहीं दिए जाएंगे। नगरीय विकास विभाग ने अपने 20 सितम्बर के आदेश में रियायतों के दो प्रावधान विलोपित कर दिए। जबकि, दो अन्य प्रावधान में बदलावा किया गया। बताया जा रहा है कि सरकार को डर था कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह मामला उठा तो संभव है कि प्रशासन शहरों के संग अभियान पर रोक लगा दे। इसी कारण आनन-फानन में यह किया गया।
इन्हें किया विलोपित
ऐसी कॉलोनियां जहां निर्धारित सुविधा क्षेत्र उपलब्ध नहीं है तो पास के क्षेत्र में जमीन चिन्हित की जा सकती है। सुविधा क्षेत्र में कमी की पूर्ति के लिए भूखंडधारियों से अनुपातिक फेसेलिटी सेस लिया जाए।
इसमें संशोधन
पहले : कॉलोनियों में 25 प्रतिशत से कम भूखंडों पर निर्माण (एक इकाई व चारदीवारी) होने, सुविधा क्षेत्र निर्धारित प्रतिशत से कम होने पर उसकी पूर्ति भूखंडों में से नहीं हो सकती है तो भी फेसेलिटी सेस लिया जा सकता है। आरक्षित दर या डीएलसी दर की 25 प्रतिशत (जो भी कम हो) की दर से राशि लेकर पट्टे दिए जा सकेंगे।
अब : कॉलोनियों में 25 प्रतिशत से कम भूखंडों पर निर्माण (एक इकाई व चारदीवारी) होने, सुविधा क्षेत्र 30 या 40 प्रतिशत (जो भी लागू हो) से कम होने पर प्रस्तुत प्लान व सर्वे में सृजित भूखंडों का क्षेत्रफल कम करके सुविधा क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।
पहले : ले-आउट प्लान में सरकारी भूमि शामिल होने पर उसका चिन्हित करेंगे और सरकारी भूमि में स्थित भूखंडों की राशि सरकारी जमीन की दर से लेकर पट्टे देंगे। चिन्हिकरण नहीं होने पर सभी भूखंडधारियों से सरकारी भूमि की अतिरिक्त राशि लेकर पट्टे दिए जा सकेंगे।
अब : ले-आउट प्लान के मध्य में सरकारी भूमि शामिल होने पर उसका चिन्हित करेंगे और सरकारी भूमि में स्थित भूखंडों की राशि सरकारी जमीन की दर से लेकर पट्टे दिए जाएं। लेकिन रास्ता, पार्क व सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग होने वाली भूमि एवं जिस भूमि का स्वतंत्र उपयोग संभव हो, उसको छोड़ते हुए राशि लेकर पट्टे दे सकेंगे।
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