सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त पैनल के सदस्य ने CJI को पत्र लिखा

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति के सदस्यों में से एक अनिल घनवत ने मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वो जल्द से जल्द मार्च में पैनल की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट को जारी करने पर विचार करें, या समिति को या उसे करने के लिए अधिकृत करें. सीजेआई एनवी रमना को लिखे अपने पत्र में घनवत ने कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में कृषि कानूनों को निरस्त करने के सरकार के फैसले के बाद समिति की रिपोर्ट अब उन कानूनों के संबंध में प्रासंगिक नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में किसानों के मुद्दों पर ऐसे सुझाव हैं जो बड़े जनहित के हैं. साथ ही कहा कि ये रिपोर्ट एक शैक्षिक भूमिका भी निभा सकती है और कई किसानों की गलतफहमी को कम कर सकती है, जो मेरी राय में कुछ नेताओं की तरफ से गुमराह किए गए हैं, जो इस बात की सराहना नहीं करते हैं कि कैसे एक न्यूनतम विनियमित मुक्त बाजार राष्ट्रीय संसाधनों को उनके सबसे अधिक उत्पादक उपयोग के लिए आवंटित कर सकता है. शेतकारी संगठन के वरिष्ठ नेता और स्वतंत्र भारत पार्टी के अध्यक्ष घनवत ने सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विशिष्ट कानून अब मौजूद नहीं हो सकते हैं.

‘विनियमन ही किसानों और पर्यावरण के लिए नुकसान का कारण रहा’

सीजेआई को लिखे अपने पत्र में घनवत ने कहा कि मैं अदालत के ध्यान में लाना चाहता हूं कि कई दशकों से भारत के किसान अपने आप में उद्यमी के रूप में, ऐसे विनियमन से पीड़ित हैं जो उनके उत्पादन और विपणन प्रयासों को रोकता है. इस विनियमन का अधिकांश भाग संविधान की अनुसूची 9 में निहित है, जो न्यायिक जांच से दूर. विनियमन का उद्देश्य एक उद्यमी की कार्रवाई से होने वाले किसी भी नुकसान को कम करना है, लेकिन किसानों के मामले में विनियमन ही किसानों और पर्यावरण के लिए नुकसान का कारण रहा है. इन कानूनों को हमारे किसान आंदोलन ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था, लेकिन किसानों की ओर से पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया था, क्योंकि भारत सरकार की नीति प्रक्रिया सलाहकार नहीं है. मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध करता हूं कि वो सरकार को एक अनुकरणीय, मजबूत नीति प्रक्रिया विकसित करने और लागू करने का निर्देश देने पर विचार करे, जिसका विकसित देशों में पालन किया जाता है.

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