Putin India Visit : पुतिन ने छह घंटे के दौरे में 28 समझौतों पर लगाई मुहर

जयपुर। कोरोना के बीच साल 2021 की पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा। छह घंटे भारत में रुके। भारत को अटूट मित्र देश बताया। अमरीका के विरोध और चीन की चिढ़न के बीच 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रूस और भारत की दोस्ती इन्हीं चार वाक्यों से बयां हो जाती है।
दरअसल जानकार पुतिन और मोदी की मुलाकात को भारत और रूस के रिश्तों के भविष्य की नींव बता रहे हैं। क्योंकि अगर ये रिश्ता, भारत का ये दौरा अहम नहीं होता तो राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली नहीं आते। ये वही पुतिन हैं जो रोम में आयोजित हुए जी-20 के शिखर सम्मेलन नहीं गए। ग्लासगो में हुए पर्यावरण सम्मेलन COP26 में भी पुतिन नहीं पहुंचे. यहां तक कि उन्होंने चीन का अपना हाई प्रोफाइल दौरा भी टाल दिया। राष्ट्रपति पुतिन मार्च 2020 के बाद दूसरी बार अपने देश से बाहर निकले हैं। इससे पहले वो सिर्फ इसी साल जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मिले थे। इसके बाद ये दूसरा मौका है जब वो किसी विदेशी नेता से रूस के बाहर मिले हों। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बात की शुरुआत में ही इसका जिक्र करते हुए कहा, मैं जानता हूं कि पिछले 2 वर्ष में ये आपकी दूसरी विदेश यात्रा है और आपका भारत के प्रति जिस तरह से लगाव है उसका ये एक प्रकार से प्रतीक है। भारत-रूस के संबंधों का कितना महत्व है। ये इससे साबित होता है।

अमरीका को खरी खरी सुनाने के लिए की भारत की तारीफ
यही नहीं, रूस ने एस-400 मिसाइल सिस्टम डील पर भारत की अमरीका को खरी-खरी सुनाने पर जमकर तारीफ भी की है। अमरीका के तमाम विरोध के बाद भी भारत ने मॉस्को के साथ इस मिसाइल डील को अंजाम तक पहुंचाया है। यहां तक कि अमरीका ने इस डील को रुकवाने के लिए तमाम प्रयास किए थे और प्रतिबंधों तक की धमकी दे दी थी।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister) ने इस मौके पर सोमवार को कहा कि हमारे भारतीय मित्रों ने स्पष्ट और दृढ़ता से समझाया कि वे एक संप्रभु देश हैं और वे तय करेंगे कि किसके हथियार खरीदने हैं और कौन इस और अन्य क्षेत्रों में भारत का भागीदार बनने जा रहा है।
पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी (Talk between Russian President Putin and PM Narendra Modi) के बीच द्विपक्षीय बैठक में सीमा पार आतंकवाद पर भी चर्चा हुई। बैठक में अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को नहीं होने देने को लेकर भी बात हुई।
मोदी-पुतिन के बीच हुई बातचीत के जारी बयान में बताया गया कि बैठक में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई और वहां शांति को लेकर रणनीति पर बात की गई।
दोनों देशों ने कनेक्टिविटी से लेकर सैन्य सहयोग, ऊर्जा साझेदारी से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र में भागीदारी के अनेक मुद्दे शामिल हैं। साथ ही संयुक्त बयान जारी कर अपनी दोस्ती को शांति, प्रगति और समृद्धि की साझेदारी करार दिया।

समय बदला, पर नहीं बदले भारत और रूस के रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए पिछले कई दशकों में वैश्विक स्तर पर कई मूलभूत बदलाव आए हैं। कई तरह के राजनीतिक समीकरण उभरे हैं। लेकिन इन सभी बदलावों के बीच भी भारत और रूस की दोस्ती स्थिर रही है। दोनों देशों ने न सिर्फ एक दूसरे के साथ नि:संकोच सहयोग किया है, एक दूसरे की संवेदनशीलताओं का भी खास ध्यान रखा है। यह देशों की दोस्ती का एक अनोखा और विश्वसनीय मॉडल है।

भारत समय की कसौटी पर खरा उतरा भरोसेमंद देश

कोरोना संकट के बीते दो सालों के दौरान अपनी दूसरी विदेश यात्रा पर दिल्ली आए राष्ट्रपति पुतिन ने भी कहा कि रूस की नजर में भारत एक महान शक्ति, एक मित्र देश और समय की कसौटी पर परखा हुए भरोसेमंद दोस्त है। दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बढ़ रहे हैं और भविष्य की ओर देख रहे हैं। भारत और रूस के बीच 21वीं शिखर वार्ता के साथ ही सोमवार को दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों की 2+2 बातचीत का भी दौर हुआ। बैठक के बाद विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत और रूस के बीच वार्ताओं में व्यापक और खुली चर्चा हुई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख के सीमा तनाव से लेकर हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी पहलुओं पर बातचीत हुई।

अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर की योजना आगे बढ़ाने पर हुई रजामंदी
उन्होंने भारत और रूस के बीच हुई शिखर वार्ता और समझौतों को दोनों देशों के रिश्तों का दायरा बढ़ाने वाला और नए मुकाम तक पहुंचाने वाला करार दिया। श्रृंगला के मुताबिक एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर की योजना आगे बढ़ाने पर रजामंदी हुई। वहीं दोनों पक्ष जल्दी ही भारत के चेन्नई को रूस के व्लादिवोस्तक तक जोड़ने वाले समुद्री गलियारे पर भी तेजी से काम करने को सहमत हैं।

सैन्य और तकनीकी सहयोग समझौते को अगले 10 साल के लिए बढ़ाने का फैसला
भारत और रूस ने अपने सैन्य और तकनीकी सहयोग समझौते को अगले 10 साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत साझा सैन्य उत्पादन और अनुसंधान-विकास पर सहमति बनी है। वहीं अपेक्षा के विपरीत भारत और रूस के बीच रिवर्स लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते पर मुहर नहीं लग पाए। इस समझौते के तहत भारत को आर्कटिक क्षेत्र में रूसी ठिकानों से रसद भरने की सुविधा हासिल हो सकेगी।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और सख्ती पर बनी सहमति

इस बीच बैठक के बाद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जहां दोनों देशों की साझेदारी पर संतोष जताया। वहीं हिंद प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक पैंतरेबाजी को लेकर तंज भी कसा। अमरीका का नाम लिए बिना रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि इन दिनों हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई तरह के समूह बनाने की कोशिश हो रही है। ऑस्ट्रेलिया-अमरीका और ब्रिटेन के समूह ऑकस की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के समूह बेमानी हैं। इतना ही नहीं लावरोव ने ऑस्ट्रेलिया को नाभिकीय पनडुब्बी देने के फैसले पर भी ऐतराज जताया।
भारत और रूस के शीर्ष नेताओं ने आंतकवाद और अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर भी चर्चा की। विदेश सचिव के मुताबिक दोनों पक्ष इस बात को लेकर एकराय थे कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त उपाय किए जाने चाहिए। इतना ही नहीं दोनों देशों ने इस बारे में भी सहमति जताई कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए करने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। संयुक्त बयान में दोनों मुल्कों ने अलकायदा, आईएसआईएस और लश्कर-ए-तोयबा जैसे संगठनों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने का भी संकल्प जताया। शिखर वार्ता के साथ हुए समझौतों की कड़ी में भारत के रिजर्व बैंक और रूस के बैंक ऑफ रशिया ने सायबर हमलों के खिलाफ मिलकर लड़ने का करार किया। इसके अलावा इस्पात के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने के लिए सहयोग समझौते पर दस्तखत किए।



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