जयपुर।
अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि व्यक्ति सेवा भाव के साथ दूसरों की मदद कर अपने जीवन के उद्देश्य को सार्थक कर सकता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इसी सोच के साथ कुष्ठ रोगियों की सेवा की और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए। महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश को आज दुनिया ने आत्मसात किया है और दुनिया के कई देश आज भी महात्मा गांधी के अहिंसा के संदेश का लोहा मानते हैं। यूएन में इससे जुड़ा प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।
मुख्यमंत्री रविवार को शहीद दिवस पर सार्थक मानव कुष्ठ आश्रम में आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। कुष्ठ रोगियों को जब कोई नहीं अपनाता था, उस समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें गले लगाया और उनकी सेवा करने में कभी संकोच नहीं किया। इससे समाज के कई वर्गों में इस रोग एवं रोगियों के प्रति घृणा कम हुई।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुष्ठ आश्रम को 5 लाख रुपए की सहायता भी दी। साथ ही प्रदेश में चल रहे 16 कुष्ठ आश्रमों में रह रहे कुष्ठ रोगियों के कल्याण के संबंध में सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन सुझावों का परीक्षण कर कुष्ठ आश्रमों में रह रहे लोगों की मदद की दिशा में कदम उठाएगी।
इधर, विश्व के गांधी पर व्याख्यान एवं प्रतिमा अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में भाईचारे, प्रेम, सौहार्द तथा सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार जन-जन तक पहुंचे। बापू के सिद्धांतों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार समर्पित भाव से काम कर रही है।
गहलोत रविवार को शहीद दिवस के अवसर पर वीसी के माध्यम से ’विश्व के गांधी’ विषय पर व्याख्यान तथा झुंझुनूं जिला कलक्ट्रेट परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद, हिंसा, कट्टरता तथा परस्पर अविश्वास का जो माहौल बना हुआ है, उसमें गांधी के सिद्धान्त हमें सही राह दिखा सकते हैं। गांधीजी की विचारधारा ही हिंसा, नफरत और आतंक से उपजी समस्याओं का कारगर हल है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से तैयार किए गए गांधीजी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए‘ के संस्कृत-हिन्दी संस्करण का लोकार्पण किया तथा अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘स्वरमंगला’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में मंत्री बी डी कल्ला, बृजेन्द्र ओला, जाहिदा खान और गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने भी विचार व्यक्त किए।
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