जयपुर। हैरिटेज नगर निगम में उठा सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि जिन विधायकों ने मुनेश गुर्जर को सवा साल पहले कुर्सी तक पहुंचाया, अब वे ही हटाने में लगे हुए हैं।
महापौर तो मोहरा, जिला अध्यक्ष पर निगाह
— एक विधायक हैरिटेज नगर निगम क्षेत्र का जिलाध्यक्ष बनना चाहते हैं तो दूसरे विधायक अपने क्षेत्र से महापौर बनाने की जुगत में लगे हैं। तीसरे विधायक जिला अध्यक्ष तो अल्पसंख्यक चाहते हैं, लेकिन वे विधायक को नहीं चाहते। अपने किसी आदमी को इस कुर्सी पर बैठाना चाहते हैं।
— महापौर समर्थक पार्षदों का कहना है कि यदि अल्पसंख्यक समुदाय से महापौर बनाना था कि सवा साल पहले क्यों नहीं बनाया। क्योंकि किशनपोल और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायकों को डर था कि यदि मुस्लिम महिला को महापौर बनाया तो इन सीटों के लिए नया दावेदार खड़ा हो जाएगा। इस पूरे मामले में मंत्री महेश जोशी और प्रताप सिंह बैकफुट पर दिखाई दे रहे हैं।
सियासत में चल रहा शह और मात का खेल
1—रफीक खान, आदर्श नगर: ऐसा माना जा रहा है कि महापौर को हटाने के लिए यूनानी मछली अभियान की शुरुआत यहीं से हुई। कोरे कागज पर पार्षदों ने एक—एक कर हस्ताक्षर किए।
2—अमीन कागजी, किशनपोल: यहां के पार्षदों ने भी सहमति दी। क्योंकि जिस नसरीन बानो का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है, वे इसी विस क्षेत्र से आती हैं। इनके ससुर रउफ खान विधायक रफीक खान के करीबी बताए जाते हैं। नसरीन को टिकट भी इन्हीं की वजह से मिली थी।
3— महेश जोशी, हवामहल: अपने चिर परिचत अंदाज में वेच एंड वाच की स्थिति में हैं। हालांकि उनका समर्थन मुनेश गुर्जर को है। महापौर हटीं तो इनके समर्थन उप महापौर बने असलम फारुखी का भी हटना तय है।
4—प्रताप सिंह खाचरियावास, सिविल लाइन्स: महापौर हटीं तो उप—महापौर की सीट इस विधानसभा क्षेत्र में आने की सर्वाधिक संभावना है। वे लोग फिर से सक्रिय हो गए हैं तो शुरुआती दिनों में सक्रिय थे।
काम में अटकाया रोड़ा
पार्षदों को लोकतांत्रिक तरीके से अपना महापौर चुनने का अधिकार है। पार्षदों के काम में रोड़ा अटकाया गया। समितियों का गठन नहीं किया गया। इन सभी से महापौर के प्रति पार्षदों मेें नाराजगी है। तभी 35 पार्षदों ने महापौर को हटाने की मांग की है।
—रफीक खान, विधायक, आदर्श नगर
हटाया जाना संभव नहीं
नगर पालिका अधिनियम में निर्वाचन के दो वर्ष से पहले अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान नहीं है। इसके बाद तीन चौथाई पार्षदों का समर्थन होना जरूरी है। यदि महापौर इस्तीफा देती हैं तो फिर से चुनावी प्रक्रिया होगी।
—अशोक सिंह, पूर्व विधि निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग
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