केंद्रीय बजट समाज के सभी समुदायों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाला: अभाविप
जयपुर।
वर्ष 2022 - 23 के लिए लाए गए सामान्य बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,04,277.72 करोड़ को आवंटित करने के कदम का अभाविप ने स्वागत किया है। केंद्रीय बजट का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री निधि शिक्षा, रोजग़ार, परिवहन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा सहित उद्यमिता, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा समाज के सभी वर्गों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर केंद्रीय बजट में की गई घोषणाएं कोविड के बाद विश्व के बदलते स्वरूप के अनुरूप भारत को विकसित होने तथा प्रतिस्पर्धायोग्य बनाने में सहायक होगी।
डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा स्वागत योग्य
केंद्रीय बजट में, उच्चतर शिक्षा के लिए 6.46 फीसदी की बढ़त करते हुए 40,828 करोड़ रुपए आवंटित किए गए साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान को दिए जाने वाले बजट में भी सकारात्मक बढ़ोत्तरी हुई है। कोरोनाजन्य परिस्तिथियों के कारण शिक्षा के अभाव से जूझ रहे छात्रों के लिए प्रधानमंत्री ई-शिक्षा योजना को आगे बढ़ाते हुए, एक कक्षा-एक चैनल की घोषणा की गई है जिसके तहत 188 नए चैनल खोले जाएंगे। ये सभी चैनल, क्षेत्रीय भाषाओं में भी कक्षा 1 से 12 तक के लिए उपलब्ध होंगे। साथ ही, बजट में डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी घोषणा स्वागत योग्य है जो शिक्षा को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के काम आएगी।
देश की अर्थव्यवस्था तथा रोजग़ार को सुदृढ़ करने में सहायक स्टार्ट-अप को मिलने वाले कर-प्रोत्साहन को 23.03.2023 तक बढ़ाया जाना, देश को आत्मनिर्भर करने की तरफ सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है और युवाओं में जोश विकसित करने का काम करेगा। नगरीय योजना की शिक्षा के लिए पांच नए संस्थान खोलने की घोषणा भी प्रशंसनीय है।
त्रिपाठी ने कहा, वर्तमान समय की परिस्तिथियों तथा विश्व के बदलते स्वरूप को देखते हुए जिस प्रकार से केंद्र सरकार ने शिक्षा, स्वास्थय, आधारभूत संरचना तथा संघीय ढांचे की व्यवस्था के अनुरूप राज्यों के लिए बजट आवंटित किया है, वह निश्चित रूप से भारत को विकास के पथ पर अग्रसर करेगा। शिक्षा के लिए बढ़ाए गए आवंटन का छात्र समुदाय स्वागत करता है। उच्च शिक्षा में बढ़ा 5000 करोड़ और स्कूली शिक्षा के लिए बढ़ा 9000 करोड़ निश्चित ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वन को गति देगा। विशेष रूप से केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक आवंटित 2000 करोड़ देश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम करेगा। *****
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