बजट में ऋण मुक्ति और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा नहीं होने से आक्रोश
जयपुर। राज्य बजट में ऋण मुक्ति और न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीद आरम्भ करने के लिए कानून बनाने की चर्चा नहीं होने से राज्य के किसान आक्रोशित हैं और इस आक्रोश को व्यक्त करने के लिए वह 2 मार्च को विधानसभा कूच करेंगे। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने इसका ऐलान किया है।
तीन साल से कर रहे हैं मांग
जाट ने कहा कि तीन साल से वह राज्य सरकार से लगातार इसकी मांग कर रहे हैं। किसानों की ओर से कितने ही ज्ञापन सीएम अशोक गहलोत को सौंपे गए। कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, प्रमुख शासन सचिव कृषि और सहकारिता और कृषि आयुक्त के साथ इस मसले पर चर्चा हुई। अतिरिक्त शासन सचिव खाद्य और नागरिक आपूर्ति, कृषि विपणन बोर्ड के निदेशक, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, राजफेड के प्रबंध संचालक, मुख्यमंत्री के सयुक्त सचिव सहित अनेक अधिकारियों से विचार.विमर्श हुआ। मुख्य सचिव से चार बार चर्चा की गई। गत वर्ष 9 नवंबर को मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया गया, इन सभी में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्राप्ति की सुनिश्चितता के लिए कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 की धारा 9 (2) (XII) को बाध्यकारी बनाने की आवश्यकता को स्वीकार किया गया।
इसलिए जरूरी है बाध्यता
उल्लेखनीय है कि कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 की धारा 9 (2) में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर क्रय विक्रय रोकने का एच्छिक प्रावधान है। इसे बाध्यकारी बनाने के लिए MAY को SHALL शब्द से स्थानापन्न करने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाएगा! इसकी क्रियान्वित के लिए कृषि उपज मंडी नियम 1963 के नियम 64 (3) में संशोधन कर नीलामी बोली न्यूनतम समर्थन मूल्य से आरंभ हो जाएगी। जिससे किसानों को अपनी उपजो का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो जाएगा ।
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