राजस्थान को मिलेगा 7 लाख टन अधिक कोयला

जयपुर। राजस्थान के तापीय बिजलीघरों केे लिए कोल इंडिया सात लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराएगी। विद्युत भवन में शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल और कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। Rajasthan Thermal Power Station कोयला संकट के दौरान जून में करीब 2448 मेगावाट उत्पादन रह गया था, जो बढ़कर अब औसतन 6000 मेगावाट उत्पादन होने लगा है। कोल इंडिया से संचालित तापीय बिजलीघरों के लिए प्रतिदिन 11 रैक आपूर्ति की जरूरत है।

बैठक में कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने विश्वास दिलाया कि राजस्थान को मांग के अनुसार कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एसीएस ऊर्जा डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में तापीय बिजलीघरों की 7580 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता है, जिसमें से 3240 मेगावाट उत्पादन क्षमता की कोटा, छबड़ा व सूरतगढ़ इकाई के लिए कोल इंडिया से कोयला उपलब्ध कराया जाता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया ने एसईसीएल की दीपिका माइंस से 5 लाख टन और एनसीएल की खडिया माइंस से दो लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराना आरंभ कर दिया है। रेलवे से रैक की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विद्युत उत्पादन निगम व राज्य सरकार की ओर से संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं।
कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने बताया कि विदेशों से आयातीत कोयले के दाम बढ़ने और देश में देर तक मानसून के चलते कोयले का संकट उत्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि कोल संकट, मानसून और कोविड की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कोल इंडिया ने कोयले का 25 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पादन कर कोयला उपलब्ध कराया, जिससे देश में 17 प्रतिशत विद्युत उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। सीएमडी राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम आरके शर्मा ने बताया कि कोल इंडिया से संचालित तापीय बिजलीघरों के लिए प्रतिदिन 11 रैक आपूर्ति की जरूरत है।



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