जयपुर। वन्य जीवों की दुर्घटना और असामयिक मौत पर मद्रास उच्च न्यायालय ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने संबंधित अपराधों की जांच के लिए तमिलनाडु, केरल और केंद्र सरकार को दोनों राज्यों व सीबीआई के अधिकारियों के साथ मिलकर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के आदेश दिए हैं।
14 तक देना होगी सूची, एसपी-डीएफओ भी होंगे शामिल
न्यायमूर्ति वी. भारतीदासन और न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को तमिलनाडु और केरल राज्यों को 14 फरवरी तक एसआईटी में शामिल होने वाले अधिकारियों की एक सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जिसमें पुलिस अधीक्षक और डीएफओ रैंक के वन अधिकारी शामिल होने चाहिए। अपराधों में जानवरों का अवैध शिकार, बिजली के झटके से जानवरों की मौत और हाथियों और अन्य जंगली जानवरों की अन्य आकस्मिक मौतें शामिल हैं।
एसपी निर्मला देवी भी होंगी शामिल
हाईकोर्ट ने सीबीआई की पुलिस अधीक्षक एन. निर्मला देवी को भी टीम में शामिल करने का निर्देश दिया, जो वन्यजीव अपराधों से संबंधित कई मामलों की जांच कर रही हैं। कोर्ट ने जानवरों के अवैध शिकार के साथ-साथ हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के करंट और सड़क और रेल दुर्घटनाओं पर जनहित याचिकाओं के एक बैच के बाद अंतरिम निर्देश जारी किया। इसने रेलवे को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि तेज गति वाली ट्रेनों से हाथियों की मौत न हो। पालक्काड़ और मदुक्करै के बीच में मैंगलोर-चेन्नई एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से तीन हाथियों की मौत हो गई थी।
पर्यवेक्षक तैनात करने का दिया था निर्देश
अदालत ने उस समय दक्षिण रेलवे और तमिलनाडु के वन विभाग को इस सेक्टर में ट्रेनों की गति को कम करने के साथ-साथ रात के दौरान अधिक वन्यजीव पर्यवेक्षक तैनात करने सहित अन्य उपाय करने का निर्देश दिया था, ताकि हाथियों को रेल पटरियों तक पहुंचने से रोका जा सके। अदालत ने दक्षिण रेलवे को 25 फरवरी तक सोलर फेंस नहीं लगाने और इसके बारे में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के साथ विचार-विमर्श करने और उनसे प्राप्त इनपुट के आधार पर निर्णय लेने का भी निर्देश दिया।
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