जयपुर। प्रदेश के शहरों में भूखंडों पर टांका बनाने का प्रावधान लागू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। प्रमुख सचिव यूडीएच कुंजीलाल मीणा की अध्यक्षता में मंगलवार को नगर नियोजन विभाग की समीक्षा बैठक में इस पर मंथन किया गया। बैठक में सामने आया कि वर्षा जल पुनर्भरण संरचना को लेकर अधिकतर लोगों में रुचि नहीं है। क्योंकि, इस स्ट्रक्चर के पानी का तुरंत इस्तेमाल नहीं हो सकता है। इसी कारण लोग इस स्ट्रक्चर के निर्माण पर रुचि नहीं ले रहे। इस कारण टांका बनाने का प्रावधान लागू करने की जरूरत जताई गई है। कारण, इसमें संग्रहित पानी का तुरंत उपयोग हो सकता है। इस पर मीणा ने अधिकारियों को इस मामले में सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। सरकार स्तर पर मामले में अंतिम निर्णय होगा।
लैंड पूलिंग कानून के उपयोग पर किया जाएगा फोकस
शहरों में जन सुविधाओं और विभिन्न आधारभूत प्रोजेक्ट्स के लिए लैंड पूलिंग कानून के उपयोग पर ज्यादा फोकस किया जाएगा मुख्य नगर नियोजक आर.के विजयवर्गीय के प्रजेंटेशन दिया। इस आधार पर कुंजीलाल मीणा ने इस सम्बंध में काम शुरू करने के लिए कहा। इस प्रेजेंटेशन में बताया गया कानून के इस्तेमाल से किस तरह आसान है। किसी भी प्रोजेक्ट या जन सुविधा के लिए भूमि जुटाना आसान है।
अभी भूखंड 225 वर्गमीटर है तो बारिश का पानी सहेजना अनिवार्य
राज्य में कम से कम 225 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखंड पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना जरूरी है। इतने और इससे बड़े भूखण्डधारियों को बारिश का पानी को सहेजना अनिवार्य किया जा चुका है। पहले यह 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखंडों पर ही यह लागू था, जिनकी संख्या अभी केवल 4 से 5 लाख ही है। नगरीय विकास विभाग ने कुछ माह पहल ही इसके आदेश जारी किए। इसके बाद मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन किया गया। सूत्रों के मुताबिक पहले इसे 167 वर्गमीटर से शुरुआत करने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐसे भूखंडों पर सेटबैक में ज्यादा जगह नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
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