भवनेश गुप्ता
जयपुर। राज्य सरकार पट्टों की रेवड़ी बांटने के लिए फिर बड़ी छूट देने की तैयारी में है। इनमें कृषि भूमि पर बसी हुई हजारों कॉलोनियां हैं। इनके नियमन के लिए कट ऑफ डेट 17 जून 1999 से बढ़ाकर दिसम्बर, 2018 निर्धारित की जाएगी। ऐसा हुआ तो ऐसी सभी कॉलोनिेयों के नियमन की राह खुल जाएगी, जहां भूखंड व सुविधा क्षेत्र का अनुपात 60:40 की बजाए 70:30 है। यानि, सुविधा क्षेत्र के निर्धारित 40 प्रतिशत में से दस प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर बसावट कर दी गई है।
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के निर्देशन में शुक्रवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस पर मंथन हुआ, जिस पर सभी ने सहमति जताई। हालांकि, फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर होगा। इसके बाद एक्ट में संशोधन के लिए प्रस्ताव विधानसभा पहुंचेगा। बैठक में अधिकारियों का तर्क था कि सरकार ने 17 जून, 1999 से पहले बसी कॉलोनियों में 70:30 के अनुपात में कॉलोनियों के नियमन की छूट दी है। जबकि इसके बाद की हजारों कॉलोनियां भी ऐसी ही हैं, जहां सुविधा क्षेत्र 60:40 के अनुपात में नहीं है। ऐसे में कट आॅफ डेट को बढ़ाया जाता है तो हजारों कॉलोनियों का नियमन हो सकेगा। प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत 10 लाख पट्टे बांटने का लक्ष्य पूरा करने के लिए सरकार यह बदलाव करना चाह रही है।
भू राजस्व अधिनियम में बदलाव करना होगा
कट आॅफ डेट बढ़ाने के लिए भू-राजस्व अधिनियम में बदलाव करना होगा। विधानसभा तक यह मामला जाएगा। ऐसा होने से हजारों भूखंडधारियों को पट्टा मिल सकेगा। साथ ही भूखंड का पट्टा लेने के लिए पहले से कम राशि देनी होगी।
आवासन मण्डल ने मांगा पट्टा देने का अधिकार
सरकार अवाप्तशुदा जमीन पर बसी कॉलोनियों में भी पट्टा देगी। इनमें आवासन मण्डल के लिए अवाप्तशुदा जमीन पर बसी कॉलोनी भी है। मण्डल प्रशासन का तर्क है अब मण्डल ही अपने स्तर पर ऐसी कॉलोनियों में पट्टा जारी कर सकता है, इसके लिए उन्हें अधिकार दिए जाएं। अभी तक जेडीए या अन्य स्थानीय निकाय पट्टा देते आए हैं। आवासन मण्डल की जमीन पर ऐसी करीब 125 कॉलोनियां हैं। इनमें अकेले जयपुर शहर में 81 है। जेडीए ने अभियान के दौरान पट्टे देने के लिए मण्डल ने एनओसी मांगी थी, लेकिन मण्डल ने जेडीए की प्लानिंग को पलट दिया।
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