यज्ञ का अर्थ प्रतिदान देना है-डॉ. देवदत्त पटनायक

सामाजिक विज्ञान और मानविकी में बहु.विषयक रुझान पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

जयपुर। मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर के कला विभाग,मानविकी और सामाजिक विज्ञान स्कूल की ओर से सामाजिक विज्ञान और मानविकी में बहुविषयक रुझान पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि धार्मिक कथाओं के प्रख्यात वक्ता और विद्वान डॉ. देवदत्त पटनायक थे। डॉ. पटनायक ने भारतीय धर्मशास्त्र की वैज्ञानिक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि यज्ञ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक प्रक्रिया है। हमारे आख्यानों में, यज्ञ का अर्थ प्रतिदान देना है। प्रकृति हमें सब कुछ देती है, इसके प्रतिदान में हम उसे यज्ञ अर्पित करते हैं। जब यह प्रतिदान नहीं दिया जाता है, तो यह अधर्म बन जाता है। वर्तमान संदर्भ में हमें यह समझना होगा कि हमें अपने धार्मिक मीमांसाओं के लिए अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। अध्यक्षीय भाषण देते हुए विश्वविद्यालय के प्रो. प्रेसिडेंट डॉ.एनएन शर्मा ने कहा कि आज डॉ. पटनायक जैसे विद्वान नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से अवगत कराने का एक जटिल कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की निदेशक डॉ. ऋचा अरोड़ा ने सभी का स्वागत किया। डॉ. मीरा बैन्दूर ने सम्मेलन की रूपरेखा से अवगत कराया।कला विभाग के अध्यक्ष डॉ.मणि सचदेव ने वर्तमान संदर्भ में मानविकी और सामाजिक विज्ञान के महत्व को बताया। इस मौके पर सोफिया क्लब की पत्रिका प्रतिबिंब का विमोचन किया गया। प्रोफेसर एंथोनी सेवरी राज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का संचालन डॉ.राधिकामोहन गुप्ता ने किया।

स्टूडेंट्स ने किया ओद्यौगिक भ्रमण
जयपुर। सेंट विल्फ्रेड पीजी कॉलेज की ओर से विद्यार्थियों के लिए औद्योगिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इसके तहत रसायन शास्त्र में यूपी और पीजी के विद्यार्थियों ने जयपुर के सीतापुरा स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जयपुर का दौरा किया। इस दौरान केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से संचालित किए जा रहे सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) और सेंट विल्फ्रेड पीजी कॉलेज के मध्य एक सहमति बनी है जिसके तहत विद्यार्थियों को 45 दिनों का औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे रोजगार उन्मुख हो सके। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न आकारों में प्लास्टिक बॉक्स के वस्तु निर्माण प्रक्रिया और चक्र के बारे में समझा और सीखा। छात्रों ने दुनियाभर में व्यापक रूप से मूल्यवान और अच्छी तरह से स्वीकृत उत्पादों के बारे में सीखा। संस्था के मानद् सचिव केशव बड़ाया ने कहा कि औद्योगिक भ्रमण को शिक्षण के सामरिक तरीकों में से एक मानते हैं। हम विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं प्रयोगात्मक ज्ञान के साथ-साथ नई तकनीक की जानकारी के उद्देश्य से समय-समय औद्योगिक भ्रमण कराते हैं।



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