एलियंस शब्द सुनते ही हम कल्पना करने लग जाते हैं एक ऐसे जीव की जो मानव से ज्यादा विकसित है। पर हकीकत ये है कि एलियंस शब्द का सीधा सा मतलब एक ऐसा जीव जो पृथ्वी पर पैदा न हुआ हो। दुनिया में एलियंस के बारे में चर्चा लगातार होती रहती है। कभी इसकी मौजूदगी के दावे किए जाते हैं तो कभी कहा जाता है कि एलियंस चुपके से इस धरती पर आकर चले भी गए और उनके निशान की मौजूदगी को लेकर कई किस्से और कहानियां मौजूद हैं। लेकिन अब एलियंस को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि वो धरती पर हमला भी कर सकते हैं। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम यानी नासा वैसे तो अपने द्वारा छोड़े गए उपग्रह की मदद से हवा और अंतरिक्ष पर रिसर्च करने के लिए मशहूर है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी की योजना को लेकर इन दिनों गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बाहरी अंतरिक्ष में पृथ्वी के स्थान को बीम करने की नासा की योजना अनजाने में एक विदेशी आक्रमण को ट्रिगर कर सकती है। यानी सरल भाषा में कहे तो नासा के इस कदम से एलियन धरती पर हमला भी कर सकती है। बाइनरी कोडेड 'बीकन इन द गैलेक्सी' संदेश आकाशगंगा के एक हिस्से में भेजकर सौर मंडल, पृथ्वी की सतह और मानवता के बारे में जानकारी प्रसारित की जाएगी। ये अतंरक्षि का वो हिस्सा है जिसे एलियंस सभ्यताओं के सबसे संभावित घर के रूप में पहचाना जाता है। यह संदेश सितारों के प्रमुख समूहों के साथ ही सौर मंडल, पृथ्वी की सतह और मनुष्यों के डिजीटल चित्रण के संबंध में सौर मंडल के स्थान को भी प्रसातिर करेगा। यह अरेसीबो संदेश का एक अद्यतन संस्करण है, जिसने 1974 में प्यूर्टो रिको में एक रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करके इसी तरह की जानकारी अंतरिक्ष में भेजी गई थी। हालांकि ऑक्सफोर्ड के फ्यूचर ऑफ ह्यूमैनिटी इंस्टीट्यूट (एफएचआई) के एक वरिष्ठ रिसर्च फेलो एंडर्स सैंडबर्ग ने चेतावनी दी कि इस तरह की जानकारी साझा करना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने द डेली टेलीग्राफ को बताया कि हालांकि 'इसका इतना अधिक प्रभाव है कि आपको वास्तव में इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है'। उन्होंने कहा कि अलौकिक बुद्धिमत्ता की खोज के इर्द-गिर्द 'गिगल फैक्टर' का मतलब है कि 'बहुत से लोग इससे जुड़ी किसी भी चीज को गंभीरता से लेने से इनकार करते हैं, जो शर्म की बात है क्योंकि यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
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