बीसलपुर का इतिहास कुछ कहता है, कब चलती है बांध पर चादर, पढ़ें पूरी खबर

Jaipur-Bisalpur Project : मानसून-2022 की भविष्यवाणी के साथ ही जयपुर और अजमेर की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में रख-रखाव की तैयारी शुरू हो गई है। वैसे भी बीसलपुर का इतिहास कहता है कि हर दूसरे या तीसरे साल बांध लबालब होता है और चादर चलती है। इस बार भी माना जा रहा है कि चादर चलेगी, क्योंकि 2019 में बांध ओवरफ्लो हुआ था और अब चौथा साल है। बांध के रख-रखाव पर करीब 25 लाख रुपए खर्च करने की तैयारी है। बीसलपुर बांध में वर्तमान जलस्तर के हिसाब से जयपुर, अजमेर और टोंक को 30 सितंबर 2022 तक भरपूर पानी दिया जा सकता है।

पांच बार चल चुकी है चादर
बीसलपुर बांध पर अब तक पांच बार चादर चल चुकी है और इस बार चादर चलने की उम्मीद है। बता दें कि बांध का कुल जलस्तर 315.50 मीटर है। जल संसाधन विभाग की माने तो वर्ष 2004 में पहली बार चादर चली थी। उसके बाद वर्ष 2006, 2014, 2016 और वर्ष 2019 में चादर चली थी। पिछली बार चादर चलने के दौरान जल संसाधन विभाग को बांध के सभी गेट खोलने पड़े थे। करीब 62 दिन तक बांध से पानी बाहर निकालना पड़ा था। ऐसा भी पूर्वानुमान है कि बांध 100 साल में 25 बार भरेगा।

यहां रहेगा बारिश का इंतजार

जल संसाधन विभाग की माने तो बीसलपुर में त्रिवेणी का पानी आता है और जब भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद में जमकर बारिश होती है तो बीसलपुर के दिन फिर जाते हैं। पिछले भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। इस बार मानसून की भविष्यवाणी के बाद से ही इन तीनों जिलों को लेकर कहा जा रहा है कि इस बार भी सामान्य से कहीं अधिक बारिश होने की उम्मीद है।

पिछले साल कहां कितनी बारिश दर्ज हुई

स्थान------------वास्तविक बारिश------------सामान्य बारिश

चित्तौड़गढ़--------752.3--------------------699.2

भीलवाड़ा---------615.4-------------------580.4

राजसमंद----------517.9--------------------506

चादर चली तो 81 हजार हैक्टेयर में होगी सिंचाई
बीसलपुर बांध पर चादर चलती है तो हजारों हैक्टेयर जमीन की प्यास बुझाई जा सकेगी। आगामी मानसून के दौरान बांध का जलस्तर 314 आरएल मीटर से ऊपर पहुंचेगा तो 256 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। जल संसाधन विभाग की माने तो बीसलपुर से टोंक जिले के 81 हजार 800 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई के लिए 256 गांंवों को पानी दिया जाता रहा है। करीब चार माह तक नहर चला कर खेतों में सिंचाई के लिए बांध से आठ टीएमसी पानी दिया जाता रहा है। जब भी बांध का जलस्तर 315 आरएल मीटर के आसपास पहुंचा तो किसानों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी है, लेकिन जब-जब पानी की मारीमारी रही किसान बांध के पानी की बाट जोहते रहे। इस बार भी पानी नहीं दिया जा सकेगा।

17 साल में 12 बार दिया सिंचाई का पानी
जल संसाधन विभाग की माने तो बीसलपुर बांध से सिंचाई के लिए टोंक जिले के 256 गांवों को बीते 17 साल में 12 बार सिंचाई के लिए पानी दिया जा चुका है। इसमें भी पांच बार बांध पर चादर चली और अन्य बार जलस्तर 315 के आसपास पहुंचा था। जलसंसाधन विभाग की माने तो बांध में 38 टीएमसी पानी की भराव क्षमता है और 24 टीएमसी से ऊपर होेने पर ही सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था होती रही है।



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