शिक्षकों के 26 से ज्यादा पेटेंट हुए प्रकाशित


.जेईसीआरसी के शिक्षकों के 26 से ज्यादा पेटेंट हुए प्रकाशित
200 से ज्यादा शिक्षकों को मिली ट्रेनिंग
इनोवेशन में जेईसीआरसी हर दिन रच रहा नया मकाम
जेईसीआरसी राजस्थान में बना रहा रिसर्च इको सिस्टम
जयपुर
सीतापुरा स्थित जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में पिछले 2 साल में 26 से ज्यादा पेटेंट प्रकाशित किए गए हैं। यूनिवर्सिटी का इंटिलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्यूरेट लैब लगातार इसके लिए काम कर रहा है, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय में किए गए शोध कार्य से उत्पन्न होने वाले नवाचारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। साथ ही जहां एक पेटेंट को एक्सपट्र्स द्वारा प्रकाशित कराने का शुल्क लगभग 80 हजार रुपए होता हैं वहीं जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी में पेटेंट प्रकाशित करने का पूरा शुल्क प्रबंधन द्वारा दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान में इनोवेशन और रिसर्च इकोसिस्टम को बढ़ावा देना ह। यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट प्रो.विक्टर गंभीर ने बताया कि आईपी क्यूरेट लैब का प्राथमिक फोकस इनोवेशन और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देना है, खासकर फैकल्टी, स्टूडेंट्स और नवोदित उद्यमियों के बीच और इसके लिए जेईसीआरसी दिन रात काम करती हैं और यहीं वजह है किजेईसीआरसी इनोवेशन में हर रोज नया मकाम रच रहा है। आईपी क्यूरेट लैब की क्यूरेटर पी शिवानी सिंह ने बताया कि 6 से ज्यादा वर्कशॉप्स में 200 से अधिक शिक्षकों को अब तक ट्रेनिंग मिल चुकी है।
डिजिटल नंबर प्लेट सिस्टम से यातायात पुलिस और वाहन मालिक को मिलेगी मदद
कंप्यूटर एप्लीकेशंस के प्रोफेसर डा.दिनेश धर्मदासानी ने बताया कि उन्हें खुशी है कि उनका पेटेंट प्रकाशित हुआ है, जिसके माध्यम से यातयात पुलिस और वाहन मालिक को मदद मिल सकेगी। डिजिटल नंबर प्लेट जिसमें एक वाहन के इंजन नियंत्रण इकाई के साथ जोड़ा गया एक एकीकृत सर्किट चिप होगा जिसमें पंजीकरण संख्या, चालक का लाइसेंस नंबर, विशिष्ट पहचान संख्या,वाहन बीमा संख्या,प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र संख्या और पंजीकरण संख्या शामिल होगा और समय समय पर वाहन मालिक को प्रमाण पत्र की समाप्ति तिथि के बारे में भी बताएगा।



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