पाली जिले की ये दो खदान बन गई जलदाय विभाग के लिए ‘भागीरथ’—इस तरह प्रतिदिन पाली शहर को मिल रहा शहर के लिए 30 लाख लीटर पानी

पुनीत शर्मा

प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपए का पत्थर, मार्बल व अन्य खनिज देने वाली खदानें अब पेयजल की समस्या को भी दूर करेंगी। इसकी शुरुआत जलदाय विभाग ने 15 दिन से पाली शहर से दस किलोमीटर दूर सुवानियां व मानपुर की नाडी खदानों में लगभग 100 फीट तक गहराई तक भरे बारिश के करोड़ों लीटर पानी को पाइपों के जरिए पाली शहर में फिल्टर प्लांट तक लाकर पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लेना शुरू कर दिया है। दोनों खदानों से प्रतिदिन 3 एमएलडी यानी 30 लाख लीटर पानी लिया जा रहा है।

इस व्यवस्था से पाली शहर जलदाय विभाग को जलापूर्ति में राहत मिली है। इंजीनियरों का कहना है कि दोनों खदानों में इतना पानी है कि जून माह के अंत तक आसानी से प्रतिदिन तीन एमएलडी मिलता रहेगा। अब-एक दो दिन बाद शहर के पास ही जाड़न खदान से भी तीन एमएलडी पानी लेना शुरू कर दिया जाएगा। खदानों में भरे करोड़ों लीटर पानी को पेयजल की जरूरतों के लिए लेने का यह प्रयोग सफल हो गया है। अब पूरे राज्य में पानी से भरी खदानों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है।

30 लाख लीटर पानी अतिरिक्त मिला तो सुधरी पेयजल व्यवस्था

पाली में प्रतिदिन 20 एमएलडी यानी 2 करोड़ लीटर पानी की जरूरत है। लेकिन विभाग एक स्थानीय बांध व जोधपुर से पहुंच रही वाटर ट्रेन के जरिए जरूरत के मुकाबले 17 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रहा था। अब सुवानियां से दो एमएलडी और मानपुर की नाडी खदान से एक एमएलडी यानी 30 लाख लीटर पानी प्रतिदिन मिल रहा है तो विभाग की बेपटरी हुई पेयजल व्यवस्था में सुधार आया। इंजीनियरों के अनुसार दोनों खदानों से पानी लेने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

दो दिन बाद तीन एमएलडी अतिरिक्त मिलेगा

दोनों खदानों से प्रतिदिन तीन एमएलडी पानी मिलना शुरू हुआ तो जलदाय विभाग के इंजीनियरों की हिम्मत आगे बढ़ी है। अब जाडन खदान से तीन एमएलडी अतिरिक्त पानी दो दिन बाद लेना शुरू किया जाएगा। इसके लिए खदान में 100 फीट तक गहराई में शक्तिशाली सबमर्सिबल पंपसेट डाल दिए गए हैं।

खदानों का पानी संजीवनी

सुवानियां व मानपुर की नाडी खदान में भरे पानी को पेयजल के लिए काम में लेना शुरू कर दिया है। इससे पाली शहर की पेयजल जरूरतें पूरी करने में काफी मदद मिली है। जाडन खदान से दो दिन बाद पानी लेना शुरू कर देंगे। खदानों में भरे पानी को अत्याधुनिक तकनीकों से फिल्टर किया जा रहा है। जांच में पानी की गुणवत्ता बेहतर सामने आई है।-

नीरज माथुर

मुख्य अभियंता स्पेशल प्रोजेक्ट

जोधपुर



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