बीकानेर. राज्य सरकार ने चिकित्सकों से कहा है कि आरजीएचएस में पंजीकृत पेंशनर्स तथा कर्मचारियों को सामान्य बीमारी होने पर 15 दिन की दवाइयां लिखी जाएं। इसके अलावा इस योजना में पंजीकृत पेंशनर्स एवं पारिवारिक पेंशनर्स जो क्रोनिक डिजीज से पीडि़त हैं तथा उन्हें निरंतर दवाइयाें की आवश्यकता होती है, तो चिकित्सक द्वारा आवश्यक समझे जाने तक दवाइयां परामर्श की जा सकेगी। परन्तु सहकारी दवा भंडार एवं अनुमोदित निजी मेडिकल स्टोर यह निश्चित करेंगे की एक बार में 30 दिनों से अधिक की दवाइयां नहीं दी जाएं।
आरजीएचएस परियोजना निदेशक शिप्रा विक्रम ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश में यह भी बताया गया है कि इसके अलावा सरकार के यह भी ध्यान में आया कि चिकित्सक इस योजना में शामिल कर्मचारियों की बेवजह जांच तथा दवाइयां लिख रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक होने पर ही जांच तथा दवा लेने की सलाह दी जाए।
साथ ही यदि भविष्य में किसी मरीज की चिकित्सा हिस्ट्री से बेवजह जांच एवं दवाइयां देना इंगित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की होगी। साथ ही अनावश्यक कराई गई जांचों का भुगतान भी नहीं किया जा सकेगा।सीजीएचएस के अनुरूप आरजीएचएस में भी एक लाभार्थी सदस्य के लिए प्रतिदिन सामान्यत: एक ओपीडी परामर्श ही अनुमत होगा। लेकिन आवश्यकता होने पर चिकित्सक की लिखित अनुशंसा के आधार पर दो और ओपीडी परामर्श दिया जा सकेगा।
इसके अलावा राजकीय चिकित्सक तथा अनुमोदित चिकित्सालय के चिकित्सक द्वारा स्वयं के घर पर आरजीएचएस लाभार्थी को देखे जाने की स्थिति में परामर्श पर्ची पर ओपीडी नंबर लिखा जाना अनिवार्य होगा। साथ ही पर्ची पर रोग की प्रकृति, लक्षण, प्रकार तथा तिथि के साथ स्वयं की मुहर एवं पदनाम, चिकित्सालय का नाम तथा आरजीएचएस नंबर सहित अंकित किया जाएगा।
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