संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए बना था पृथक परिसर, वीआईपी के लिए सबकी सुरक्षा खतरे में

जयपुर. सवाईमानसिंह अस्पताल परिसर स्थित संक्रामक रोग संस्थान (आईडीएच) की स्थापना संक्रामक बीमारियों का निदान करने के लिए ही की गई थी। शुरूआत में यहां डायरिया, हैजे और खसरा जैसी बीमारियों का इलाज किया गया। रखरखाव के अभाव में धीरे—धीरे इस परिसर का उपयोग ना के बराबर होने लगा। राज्य में कोविड का खतरा शुरू होने के साथ ही जिम्मेदारों को इस परिसर का फिर से खयाल आया और करोड़ों रूपए खर्च कर इसे आधुनिक आईसीयू सुविधा युक्त बना दिया गया। कोविड के समय पलंगों की मारामारी के बीच आम जनता इसके शुरू होने का इंतजार कर रही थी, लेकिन इसी बीच परिसर में आम आदमी के प्रवेश पर रोक लगाकर वीआईपी के लिए समर्पित कर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार यहां बनाया गया आइसीयू वार्ड अति आधुनिक है, जिसमें एक से दूसरे मरीज में संक्रमण प्रसार का खतरा बेहद कम रहेगा। आइसीयू की यह खूबी भी गंभीर मरीजों को नहीं मिल पाई। वर्तमान में सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज के पास संक्रामक बीमारियों के मरीजों का इलाज करने के लिए कोई पृथक केन्द्र नहीं है। डायरिया, हैजा, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों के मरीजों को भी मुख्य भवन में अन्य मरीजों के आस—पास ही रखा जाता है। जिससे संक्रमण प्रसार का खतरा लगातार बना रहता है। डिप्थीरिया मरीजों के लिए अलग परिसर बना हुआ है। कोविड के मरीज आरयूएचएस में रखे जा रहे हैं।

टीकाकरण केन्द्र..नाम आज भी संक्रामक रोग संस्थान

आधुनिक रूप लेने के बाद इसे पहले कोविड सेंटर बताया गया। बाद में इसे कोविड टीकाकरण केन्द्र बना दिया गया, जबकि इसका नाम आज भी संक्रामक रोग संस्थान ही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका उपयोग कर सभी संक्रामक बीमारियों का एक छत के नीचे उपचार किया जाना चाहिए।

पत्रिका ने डेढ़ साल पहले जता दी थी आशंका

राजस्थान प त्रिका ने इस आधुनिक परिसर के बनकर तैयार होने के बाद उजागर किया था कि यह परिसर आम मरीजों के बजाय वीआईपी के लिए ही आरक्षित रखा जाएगा। 8 सितंबर 2020 के अंक में प्रकाशित समाचार में इसे लेकर अस्पताल में उठे विरोध को उजागर किया गया था।



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