जयपुर/अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना अलवर जिले की ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की लाइफ लाइन है। हर साल करोड़ों का राजस्व देने के बाद भी सरिस्का संसाधनों के लिए जूझता रहा है। सरिस्का में स्वीकृत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदों में वर्तमान में आधे से ज्यादा पद खाली हैं।
यह एनसीआर का इकलौता टाइगर रिजर्व है। करीब 1216 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सरिस्का में बड़ी संख्या में पेड़-पौधों के साथ ही हजारों की संख्या में वन्यजीव हैं। बाघों की बढ़ती संख्या ने देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया है। रोजगार भी मिल रहा है। सरिस्का की हरियाली ऑक्सीजन उत्सर्जन का बड़ा स्रोत है। करीब 1216 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सरिस्का में हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, जिसने लाखों रुपए की आया होती है। इसके बावजूद यहां आधे पद रिक्त है।
सरिस्का में 102 बीट, वन रक्षक 66 ही
सरिस्का में वर्तमान में 102 बीट हैं, जिन पर तीन पारियों में वनरक्षकों की डयूटी अनिवार्य है। ऐसे में सरिस्का के लिए 300 से ज्यादा वनरक्षकों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में यहां 66 वनरक्षक ही तैनात हैं। इनमें भी कई वन रक्षक कार्यालय के काम करते हैं। वहीं महिला वन रक्षक वायरलैस सिस्टम का काम संभालती हैं।
स्वीकृत एवं रिक्त पदों की स्थिति
पदनाम...स्वीकृत पद...कार्यरत...रिक्त पद
सीसीएफ...1...0...1
वन संरक्षक...1...1...0
डीएफओ...3...2...1
एसीएफ...5...0...5
रेंजर प्रथम...4...3...1
रेंजर द्वितीय...9...6...3
वनपाल...12...11...1
सहा. वनपाल...22...17...5
वन रक्षक...133...66...67
पर्यटन से मिला सरकार को राजस्व
वर्ष ...आय
2016-17...13392901
2017-18...13998393
2018-19...14238551
2019-20...15457775
2020-21...9579236
2021-22...13453735
योग...80120591
सरिस्का में रिक्त पदों की सूचना विभागीय उच्चाधिकारियों को हर माह स्टेटमेंट में भेजी जाती है।
सुदर्शन शर्मा, डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना
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