मजदूर ट्रेड यूनियन को नहीं मिल रहा महत्व : बबन घोष

जयपुर। आज देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग और शिक्षा से नई खोजों के कारण आज भारत सफलता के शिखर पर है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक सभी राज्य बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल का क्या? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (west bengal assembly elections) के बाद बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है। चुनाव के बाद से पार्टी विभिन्न संगठनात्मक समस्याओं का सामना कर रही है। उत्तर प्रदेश और असम समेत कई राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी बीजेपी को पश्चिम बंगाल में अभी पूरी ताकत नहीं मिली है।

इस बीच भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन (Bharatiya Janata Mazdoor Trade Union) के अध्यक्ष बबन घोष (Baban Ghosh) ने कहा कि भारतीय ट्रेड यूनियनों के संगठन को महत्व नहीं दिया जा रहा, लेकिन अगर ठीक से देखा जाए तो यह संघ भाजपा के औजारों में से एक बन सकता है। उनके अनुसार सभी मजदूर वर्ग के लोग भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रति सम्मान रखते हैं। यदि उन्हें एक छतरी के नीचे लाया जा सकता है, तो ममता बनर्जी की सरकार (Mamata Banerjee's government) को गिराना संभव है। 2024 और 2026 वोटों के नतीजे भी बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि 2026 में ट्रेड यूनियनों का उपयोग करके भाजपा के लिए सत्ता में आना फायदेमंद होगा।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के 90% लोग किसी न किसी असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं। वे असंगठित क्षेत्र में काम करके पैसा कमाते हैं। यहां तक कि जो साधारण भाजपा समर्थक हैं, वे भी किसी न किसी तरह से काम करते हैं। अगर इन सभी लोगों के साथ छोटे-छोटे मॉड्यूल में ट्रेड यूनियन बनाई जा सकती हैं, तो बीजेपी को फायदा होगा।


उन्होंने यह भी शिकायत की कि नेतृत्व करने की उनकी क्षमता के डर से उन्हें उचित महत्व नहीं दिया जा रहा। जब तक कार्यकर्ता ट्रेड यूनियन के लिए काम कर रहे थे, तब तक उनके सम्मान नहीं मिला। लेकिन जब वे राजनीतिक कार्य के लिए अन्य राज्य गए और चुनावी हिंसा के कारण मजदूर संगठन कमजोर हो गया तो उन सभी कार्यकर्ताओं को नगर निगम चुनाव में टिकट दिया गया। जिन्हें टिकट नहीं मिला, उन्हें भी संगठन में अहम स्थान दिया गया।



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