Rajasthan Education Department: नियमों में फंस गई व्याख्याता पदोन्नति

शिक्षा विभाग में व्याख्याता पदोन्नति के नए सेवा नियमों पर विवाद खड़ा हो गया है। नए नियमों से जारी हुई पदोन्नति पात्रता सूची से करीब 10 हजार वरिष्ठ अध्यापक बाहर हो गए हैं। इन शिक्षकों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्री बी.डी. कल्ला ने शिक्षा विभाग को निर्देश देकर नए नियमों के तहत की गई पदोन्नति प्रक्रिया को रुकवा दिया है।

मंत्री कल्ला ने कहा है कि जो परंपरा चली आ रही है, वही रहेगी। इसके बाद अब शिक्षा विभाग असमंजस की स्थिति में है। कारण यह है कि पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के कार्यकाल मेें व्याख्याता पदोन्नति के सेवा नियम बदले गए थे। इधर, पदोन्नति के नियमों को लेकर उठे विवाद के बाद अभी तक विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए। अब असमंजस यह है कि पदोन्नति में नए सेवा ही लागू होंगे या पुराने नियम ही रहेंगे।

28 हजार शिक्षक पात्र थे, 18 हजार ही रह गए

शिक्षा विभाग ने हाल ही व्याख्याता पदोन्नति वर्ष 2021-22 की अंतिम पात्रता सूची जारी की है। इस पर 6 जून तक आपत्तियां मांगी हैं। इससे पहले विभाग ने पुराने नियमोें के अनुसार पदोन्नति पात्रता सूची जारी की थी। इसमें 28 हजार 301 वरिष्ठ अध्यापकों को शामिल किया था। लेकिन अब नए नियमों से जारी हुई सूची में 10 हजार 125 शिक्षकों को बाहर कर दिया गया। 18 हजार 176 शिक्षक ही पदोन्नति के लिए पात्र माने गए हैं।

10 हजार शिक्षक सूची से बाहर, मंत्री ने बदले नियम

अब आगे क्या व्याख्याता पदोन्नति के लिए नए सेवा नियमों को केबिनेट ने मंजूरी दी थी। ऐसे में इन नियमों को विभाग स्तर पर बदला नहीं जा सकता। नियमों में संशोधन कराने के लिए वापस केबिनेट में प्रस्ताव ले जाना पडे़गा। यहां से मंजूरी के बाद ही नियमों को फिर से बदला जा सकता है।

जरूरी नहीं समान विषय हों: शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री कल्ला ने कहा है कि नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। विभाग को निर्देश दिए हैं कि पहले वाले नियम ही रखे जाएं। जरूरी नहीं कि यूजी और पीजी में समान विषय हों। आज तक जो परंपरा चली आ रही है वैसे ही रहेगी।



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