जयपुर.
जलदाय विभाग में अगर किसी खरीद में इंजीनियरों को मोटा कमीशन मिलने की उम्मीद हो तो फाइल को पंख लग जाते हैं। लेकिन मामला अगर आमजन के हित से जुड़ा हो तो फाइल कछुआ चाल को भी मात देती है। फिर चाहे लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए कितना ही परेशान हों। जयपुर शहर में लगभग 450 बहुमंजिला इमारतों में रह रही 50 हजार से ज्यादा की आबादी के लिए बीसलपुर सिस्टम से जल कनेक्शन देने की कवायद पन्द्रह दिन पहले शुरू की गई थी।
जलदाय मंत्री महेश जोशी के स्तर पर गत 26 अप्रेल को विभाग के शीर्ष इंजीनियरों, बिल्डर्स और हाउसिंग सोसायटियों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। बैठक के बाद मंत्री ने बहुमंजिला इमारतों में रह रहे लोगों को जल कनेक्शन देने के लिए एक कमेटी बनाने की बात जोर-शोर से प्रचारित की। इस बैठक को हुए 15 दिन गुजर गए लेकिन अभी तक कमेटी नहीं बनी। ऐसे में बहुमंजिला इमारतों में रह रहे लोगों को जल कनेक्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
फाइल कहां अटकी, क्यों अटकी पता नहीं
पत्रिका ने पड़ताल की तो जनहित से जुडे़ इस मामले में जल भवन में बैठने वाले इंजीनियरों और जलदाय मंत्री जोशी की कार्यशैली खुल कर सामने आई। इंजीनियरों ने तपाक से कहा कि जलदाय मंत्री के पास फाइल भेज चुके हैं, वहां से आएगी तब कमेटी के गठन का आदेश जारी होगा। लेकिन इंजीनियरों ने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि मंत्री को भेजी गई फाइल कहां और किस कारण से अटकी हुई है। ऐसे में अब न जलदाय मंत्री की इस मामले में कमेटी बनाने में रुचि दिख रही है और न ही इंजीनियर बहुमंजिला इमारतों में जल कनेक्शन जारी करने को लेकर गंभीर दिख रहे हैं।
मंजूरी मिलते ही कर देंगे काम शुरूहमने तो पत्रावली मंजूरी के लिए उच्च स्तर पर भेज दी है लेकिन अभी तक पत्रावली लौट कर नहीं आई है। जैसे ही कमेटी गठन की स्वीकृति मिलेगी वैसे ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
- सी.एम. चौहान, मुख्य अभियंता शहरी
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