सिंगल यूज प्लास्टिक न सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि गोवंश की मौत का भी कारण बन रही है। इसी वजह से इसे पुन:चक्रित पॉलीथिन कैरी बैग को प्रतिबंधित करने की तैयारी की जा रही है। इतना ही नहीं, गोवंश की इन मौतों के लिए शहरवासियों की गलत आदत भी बड़ी वजह है।
दरअसल,ज्यादातर लोग हरे कचरे को पॉलीथिन की थैलियों में बांधकर बाहर फेंक देते हैं और उसी को गोवंश खा लेता है। हिंगोनिया गोशाला में गोवंश की 70 फीसदी मौत पॉलीथिन की वजह से हो रही है। हिंगोनिया गोशाला के चिकित्सालय में गोवंश के पोस्टमार्टम में सामने आया है कि पेट में 35 से 40 किलो तक पॉलीथिन निकलती है।
गोवंश के मौतों की संख्या हर महीने बढ़ रही है। जनवरी से मई तक 8637 गोवंश की मौत हिंगोनिया गोशाला में हुई है। इनके पेट से 39822 किलो पॉलीथिन निकली। इसके अलावा सिक्के, लोहे की कीलें, हवाई चप्पल तक पेट से निकलती हैं। यह अलग बात है कि लोग दूसरी तरफ गौसेवा की बात करते हैं।
माह कुल मृत गोवंश पोस्टमार्टम किया पॉलीथिन निकली
जनवरी 1801 152 6736 किलो
फरवरी 1088 196 7334 किलो
माच 1572 247 11836 किलो
अप्रेल 1968 181 7783 किलो
मइ 2208 161 6133 किलो
बढ़ रहे मौत के आंकड़े
क्या कहते हैं जिम्मेंदार अधिकारी
जो भी गोवंश गोशाला में आता है। उनमें से प्रतिदिन औसतन 50 गोवंश की मौत हो जाती है। पोस्टमार्टम में कई गायों के पेट से 50 किलो तक पॉलीथिन निकलती है। इसके अलावा सिक्के, लोहे की कीलें, हवाई चप्पल तक पेट से निकलती हैं। शहर में लोग खाना पॉलीथिन में करके फेंक देते हैं और गाय खानें के चक्कर में पॉलीथिन ही खा जाती है।
-डॉ. राधेश्याम मीणा, उप निदेशक, हिंगोनिया गोशाला
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