गोरखपुर से सोनाली बॉर्डर, भारत-नेपाल सीमा पर थोड़ी बहुत चैकिंग के बाद बॉर्डर तो पार हो गया । सलोनी सीमा से काठमांडू तक की यात्रा कठिन और सुखद है । एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ हमारे साथ- साथ नदी चलती रही, पहले से देरी की मार झेल रहे हम दौड़ना चाहते थे परन्तु उबड़खाबड़ सड़क गाड़ी को 20-25 की स्पीड से आगे बढ़ने नहीं देती। इन रास्तों से गुजरते सुखद अनुभूति तो होती है लेकिन वाहन चालक की सावधानी भी जरूरी है । रास्ते में चितवन जिला आता है । हम सभी को चाय -खाने की तलब हो रही थी। होटल दिखाई दिया न्यू नारायणी बीकानेरी होटल ,शुद्ध शाकाहारी । अपनेपन का अहसास । खाने-पीने के बाद हिसाब-किताब किया तो होटल के मालिक परमात्मा प्रसाद गुप्ता से जानकारी के लिए बीकानेर का ठिकाना पूछा तो दंग रह गया । उन्होंने बताया कि इधर बीकानेरी ब्राँड है इस नाम से ग्राहक खुद चले आते है शाकाहार का प्रतीक मानकर , हम तो बिहारी है । दूसरे देश में इतना भरोसा मेरे शहर के नाम का। रास्ते में दो तरह के पहाड़ आते है पहले पहले सूखे पहाड़, समय-समय पर इनको काटा जाता है लेकिन इसके साथ नदी नहीं चलती केवल गहरी खाई जिसमे आकाश से टकराते बड़े बड़े पेड़ आँखों को सुकून देते । रास्ते उस समय और भी अधिक सुखद अनुभूति कराने लगे जब गीले पहाडों के साथ साथ शुरू हुआ सफर ,इन पहाडों पर ऊँचे और आकाश से बातें करते दुर्लभ पेड़ हमें बार बार मिलने का न्योता दे रहे थे, दूसरी तरफ नदी। काठमांडू पहुँचने में हमें पूरे 14 घंटे लगे। भोर में चार बजे आनंद आश्रम काठमांडू पहुँच गए । इसका लोकार्पण 2018 में हमारे प्रधानमंत्री और नेपाल के प्रधानमंत्री ने किया था। आशा और आयुष्मान के साथ पशुपतिनाथ पहुँच गए। विशाल मंदिर, आकर्षक शिवलिंग पांच मुंह के पशुपतिनाथ, चांदी के बनाये चार दरवाज़े, विशालकाय नंदी , सैकड़ों बंदरों का जमावड़ा, परिसर में स्थित सैकड़ों मंदिर, मंदिर के दक्षिण में पाँच सौ चौंसठ शिवलिंग है । ऐसी मान्यता है कि पशुपतिनाथ के दर्शन से पशु योनि से मुक्ति मिल जाती है। पशुपतिनाथ मंदिर को राजा भास्कर वर्मा ने तीन मंजिला फिर उनकी संतान बशुपुस्प वर्मा ने चौथी मंजिल बनवाई ।काठमांडू में रहते हुए बिल्कुल भी विदेश में होने का अहसास नहीं होता, हिन्दुस्तानी पहनावा, रहन- सहन , बातचीत भी वैसे ही, बाजार में भारत की करेंसी, नोट किसी भी देश का हो ।भारत का एक रुपया यहाँ एक रुपया साठ पैसे में चलता है । करेंसी बदली कराने की कोई जरूरत ही नहीं । इन दिनों बीकानेर के लगभग 300 यात्रियों का दल काठमांडू की यात्रा पर है*
राजेन्द्र जोशी
कवि कथाकार
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/28v1aiP
https://ift.tt/ZfFrlVS
एक टिप्पणी भेजें