संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. राज्य सरकार की ओर से वन्य जीव संरक्षण के दावे जरूर किए जा रहे हैं लेकिन श्रीडूंगरगढ़ के क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय में बने वन्य जीव रेस्क्यू वार्ड के हालातों को देखे तो ये दावे खोखले नजर आ रहे हैं। इस वन्य जीव रेस्क्यू वार्ड में सुविधाओं के अभाव में घायल वन्य जीव काल का ग्रास बन रहे है। वर्ष 2015-16 में बना ये वन्य जीव रेस्क्यू वार्ड मूलभूत आवश्यकताओं की बाट जो रहा है लेकिन घायल वन्य जीवों का उचित इलाज कर जान बचाने की दिशा में जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
पशु चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ की कमी
राज्य सरकार की ओर से कस्बे के क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय में वन्य जीव रेस्क्यू वार्ड तो बना दिया गया लेकिन पशु चिकित्सक की नियुक्ति करना भूल गए। इस वार्ड में लाए जाने वाले घायल वन्य जीवों के इलाज के लिए न तो पशु चिकित्सक ओर न ही पशु कम्पाउंडर। साथ ही सफाई के लिए न ही कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है और न ही गंभीर घायल पशुओं के इलाज के लिए फर्नीचर, डी फ्रिज व अन्य उपयुक्त सामग्री है। कार्यालय के कर्मचारी घायल वन्य जीवों का अन्य पशु चिकित्सक को बुलाकर इलाज करवाते हैं। साथ ही शिकार हुए वन्य जीवों के पोस्टमार्टम भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हैरानी वाली बात तो ये है कि इस वार्ड में चारदीवारी भी नही बनी है।
परिवहन के लिए वाहन भी नहीं
घायल वन्य जीवों को रेस्क्यू वार्ड में लाने के लिए कोई वाहन सुविधा भी नही है। घायल वन्य जीव को लाने के लिए निजी वाहन किराए पर ले जाना पड़ता है और उस वाहन की किराया राशि का भुगतान भी सम्बंधित विभाग द्वारा समय पर नहीं किया जाता। जानकारी के अनुसार इस रेस्क्यू वार्ड में एक बोलेरो गाड़ी घायल वन्य जीवों को लाने के लिए दी हुई थी करीब एक साल पहले इस गाड़ी को यहां से लूणकरणसर भेज दिया गया।
घायल वन्य जीवों व मौत का आंकड़ा
जानकारी के अनुसार श्वानों के काटने, खेत की तारबंदी में फंसने व वाहनों की चपेट में आने के कारण हिरण, मोर व नीलगाय घायल हो जाते है और प्रति माह करीब 40 घायल वन्य जीवों को इस रेस्क्यू वार्ड में इलाज के लिए लाया जाता है लेकिन पशु चिकित्सक आदि अन्य सविधाएं नही होने के कारण इन मूक प्राणियों की मौत हो जाती है। एक आंकड़े के अनुसार गत एक वर्ष में इस रेस्क्यू वार्ड में 550 घायल वन्य जीवों को लाया गया है। जिनमें से आधे से अधिक 317 वन्य जीवों की मौत हो गई है।
वन क्षेत्र व वन्य जीव एक नजर में
जानकारी के अनुसार श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्रिय वन अधिकारी रेंज के अधीन 2100 हेक्टेयर वन भूमि है और गणना के अनुसार इस क्षेत्र में 8 हजार 156 वन्य जीव है, जिनमें 2646 हिरण, 2610 राष्ट्रीय पक्षी मोर व 566 नील सहित अन्य वन्य जीव शामिल है। साथ ही तहसील क्षेत्र के 96 गांवों में खेतों में भी वन्य जीव रहते हैं, लेकिन अगर इस रेस्क्यू वार्ड के हालात नही सुधरे तो वन्य जीवों का ये आंकड़ा बढऩे के बजाय कम होगा।
रेस्क्यू वार्ड में पशु चिकित्सक, वाहन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव में घायल वन्य जीवों के इलाज में परेशानी होती है। फिर भी अन्य स्थान से पशु चिकित्सक को बुलाकर इलाज का प्रयास किया जाता है और गंभीर घायल जीवों को बीकानेर भी भेजा जाता है। पशु चिकित्सक की नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
जितेंद्र कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी श्रीडूंगरगढ़।
रेस्क्यू वार्ड में पशु चिकित्सक की नियुक्ति व एम्बुलेंस सुविधा के अभाव में हो रही परेशानी की शिकायतें वन्य जीव प्रेमियों से मिली है। इसको लेकर वन मंत्री से मुलाकात कर समस्या समाधान की बात करेंगे। ताकि वन्य जीवों का संरक्षण हो सके।
गिरधारीलाल महिया, विधायक श्रीडूंगरगढ़।
आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति के सेवादारों को ग्रामीण क्षेत्र से घायल वन्य जीवों की सूचना मिलती रहती है। संस्था के वाहन से ही घायल जीवों को रेस्क्यू कर सेंटर तक लाते है। इतने बड़े क्षेत्र के होते हुए भी विभाग के पास एक वाहन की अनुपलब्धता ङ्क्षचता का विषय है एवं पशु चिकित्सक आदि सुविधाओं के अभाव में इलाज में परेशानी होती हैै।
मनोज कुमार डागा, अध्यक्ष, आपणों गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति
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