Big Story : विश्व पर्यावरण दिवस आज... सिर्फ एक ही पृथ्वी, इसे सहेजकर रखें



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अब भी अंधेरे में हैं तो जाग जाइये, क्योंकि कुदरत हमारी गलतियों को और नहीं सहने वाली प्रकृति के किसी भी घटक को नुकसान पहुंचाया...तो न प्राण बचेंगे न पर्यावरण। इसलिए अब...

सोचिए नहीं सींचिए

पर्यावरण का वजूद पंचतत्त्वों यानी जल, अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी पर ही निर्भर है। इनके संतुलन से प्रकृति हमें रहने योग्य पर्यावरण देती है। इनमें यदि एक भी प्रतिकूल आचरण पर उतर आए तो जीवन की कल्पना संभव नहीं। कुदरत ने हमें भरपूर संसाधन दिए, तो उन्हें उपभोग करने की मर्यादा भी। लेकिन इंसान ने लालसा के चलते इन मर्यादाओं का उल्लंघन किया, इसी का नतीजा है आज कई तरह की मुश्किलें हमारे सामने आ खड़ी हुई। हम उन जनजातियों का उदाहरण देखें, जो प्रकृति के हर उपकार को पूरे आदर से स्वीकारती हैं, वहां जीवन खुशहाल है। इसलिए, पर्यावरण को संरक्षित करना किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिए हर व्यक्ति, समाज, कबीले, संगठन और सरकारों को मिलकर काम करना होगा, प्रकृति को सींचना होगा। ये हमारी हर छोटी बड़ी कोशिशों से ही संभव है।

जयपुर. पर्यावरण संकट आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है। पत्रिका ने पर्यावरण दिवस पर लोगों के विचार जानने के लिए रेंडम सर्वे किया। सर्वे में 65 फीसदी लोगों ने माना कि नेट जीरो शब्द ही उन्होंने पहली बार सुना है। यह दोष इन नागरिकों का नहीं है, बल्कि उस सरकार का है, जो पता नहीं किसके भरोसे 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य लेकर चल रही है। 44% नहीं जानते जलवायु परिवर्तन क्या है, जबकि 65% ने नेट जीरो शब्द सुना ही पहली बार ही मानते हैं कि प्रकृति से बंद छेड़छाड़ हो। लोग एसी का प्रयोग कम करने के पक्ष में। लोग नहीं जानते जैव विविधता क्या है। लोग आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल की जगह ईवी लेना चाहते हैं। मानते हैं प्रकृति से जितना ले रहे हैं, उस उनुपात में लौटाना चाहिए। कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए कार कम चलाने पर सहमत।

खेलें सांप-सीढ़ी, कौन खिलाड़ी-कौन अनाड़ी ‘सांप’ तो रोज डसता है, और हम पर हंसता है
पर्यावरण को लेकर हमारी भूल आने वाली नस्लों तक को झेलनी होंगी। सांप-सीढ़ी का ये प्रयोग सहज भाषा में पर्यावरण की जरूरतों और हमारी नादानियों को समझाने का प्रयास है, जो खेल-खेल में बता देगा कि किस तरह की गलतियों पर विनाशरूपी सांप हम पर फन फैलाए खड़ा है और कौनसे प्रयास हमें पर्यावरण संरक्षण की सीढ़ी पर ले जाएंगे।
प्लास्टिक को ना सराहनीय पहल आपकी
क्योंकि पॉलिथीन और सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती हैं। हर वर्ष 40 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है दुनिया में। इसमें 8 से 10 लाख टन नदियों के रास्ते समुद्र में चला जाता है, जो हर वर्ष 10 लाख समुद्री जीवों की मौत का कारण बनता है।
पेड़ लगाए आप तो ग्रीन वॉरियर निकले
क्योंकि एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे 7 से 8 लोगों को प्राणवायु मिलती है। किसी आबादी के करीब सघन पेड़ एयर कंडीशनर की आवश्यकता को 50% तक कम कर सकते हैं।
कचरे का सही निस्तारण
कचरे का सही निस्तारण कर आप हीरो बन गए, क्योंकि कचरा जलाने से हानिकारक गैसें मिथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड निकलती हैं, जो पर्यावरण, ओजोन परत के साथ सेहत की भी दुश्मन है। इसके सूक्ष्म प्रदूषक फेफड़ों की बीमारी, कैंसर जैसे जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसे ही ईवेस्ट भी कम करें।
एसी का इस्तेमाल आखिर में गलती कर ही गए
आप जानते हैं एसी का ज्यादा प्रयोग पर्यावरण के लिए ठीक नहीं? चार घंटे एसी चलाने पर 6 यूनिट बिजली खर्च होगी, उस पर ग्लोबल वॉर्मिंग के भागी रहे वह अलग। 2030 तक हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों की संख्या बढ़कर 5.6 अरब हो जाएगी।
पानी बर्बाद किया मोल नहीं तुमने जाना
ये भारी भूल कर रहे हैं। हवा के बाद पानी ही तो जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्त्व है। आंकड़ों को देखें तो हर भारतीय औसतन रोज 45 लीटर पानी बर्बाद कर देता है, जो कुल उपभोग का करीब 30 फीसद है। इसलिए घर-ऑफिस में पानी बचाने के साथ ही वर्षाजल को सहेजना न भूलें। इसलिए कि यदि एक हजार वर्गफीट आकार के भवन में पांच लोग रहते हैं और वर्षाजल संचय करते हैं तो एक सीजन में ही इतना पानी एकत्र हो जाएगा, जो उस परिवार की एक वर्ष की जरूरत को पूरा कर सके।
नदियों को कचरा प्रबंधन
नदियों के किनारे तो सभ्यताएं पली हैं और आप इन्हें दूषित कर रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त, 2018 से दिसंबर, 2020 तक जुटाए 764 नदियों के नमूनों में 688 में भारी धातु की उच्च मात्रा हैं, जो सेहत और पर्यावरण के लिए खतरा है।
slogans

धूप में साया-दार दरख़्त
लदे-फदे फलदार दरख़्त
ताजा इन से हवा मिले
जीने का सब मजा मिले



पर्यावरण जागरूकता फैलाते चलो
लोगो को पेड़ों के लिए मनाते चलो
कोई मिल ही जाएगा इनका हमदर्द
अपने इरादों को मजबूत बनाते चलो


विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व

स्टॉकहोम सम्मेलन के 50 साल पूरे होने पर यह वर्ष एक ऐतिहासिक मील का पत्थर प्रस्तुत करता है। स्वीडन विश्व पर्यावरण दिवस, 2022 का मेजबान देश है, जिसका विषय ' केवल एक पृथ्वी ' है - प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने पर ध्यान केंद्रित करना - विषय के रूप में।

कब शुरू हुआ 'विश्व पर्यावरण दिवस' मनाने का सिलसिला?

World Environment Day 2022 : हर साल आज यानी 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. आज के औद्योगीकरण के दौर में पर्यावरण के बारे में सोचना बेहद ज़रूरी है, क्योकि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की वजह से पर्यावरण को पिछले कुछ दशकों में काफी नुकसान हुआ है. इसकी वजह से अब दुनियाभर के इकोसिस्‍टम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करने का संकल्प लेने के उद्देश्य से ही हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. ये समुद्री प्रदूषण, ओवरपॉपुलेशन, ग्लोबल वॉर्मिंग, सस्टनेबल कंजम्पशन और वाइल्ड लाइफ क्राइम जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच रहा है, जिसमें 143 से अधिक देशों की भागीदारी रहती है. आज पर्यावरण का बिगड़ता संतुलन और बढ़ते प्रदूषण से पूरी दुनिया जूझ रही है. इन गंभीर समस्‍याओं से उबरने का एक मात्र उपाय दुनियाभर के पर्यावरण को हरा भरा बनाना है. ये तभी संभव है जब लोग पेड़ों के संरक्षण के प्रति जागरूक हों. इसी ज़रूरत को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर विश्‍व पर्यावरण सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए ‘विश्‍व पर्यावरण दिवस’ मनाने की शुरुआत साल 1973 में की गई थी, जिसे हर साल नए थीम के साथ मनाया जाता है.


विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ को हर साल नए थीम के साथ मनाया जाता है. इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम है, ‘ओन्ली वन अर्थ’ मतलब ‘केवल एक पृथ्वी’ है. साल 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन का नारा “केवल एक पृथ्वी” था; 50 साल बाद भी, ये सच्चाई अभी भी कायम है – ये ग्रह हमारा एकमात्र घर है.



विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा ह्यूमन एनवायरनमेंट पर स्टॉकहोम सम्मेलन (5-16 जून 1972) में की गई थी, जिसमें 119 देशों में हिस्सा लिया था. सभी ने एक धरती के सिद्धांत को मान्‍यता देते हुए हस्‍ताक्षर किए. इसके बाद 5 जून को सभी देशों में ‘विश्‍व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाने लगा. भारत में 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ.



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