पानी की बाल्टी में गिरने से दो साल के मासूम की मौत

नोखा तहसील के हिम्मटसर गांव के हिम्मताराम मेघवाल पर कुदरत ने कहर इस तरह बरपाया है कि उसके सात में से पांच बच्चे एक-एक कर काल के ग्रास बन गए। चार बच्चों की असामयिक मौत के बाद वह पहले ही टूट चुका था और जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर जी रहा था, लेकिन बुधवार को उस पर फिर से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसके सबसे छोटे दो साल के मासूम हरीश की पानी की बाल्टी में डूबने से मौत हो गई।


इस सदमे के बाद अब हिम्मताराम पूरी तरह टूट चुका है और हिम्मत हार गया है। इस हादसे के बाद घर में मातम छाया है और पति-पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। पिता रूंधे गले से इतना ही बोल पाया कि उनका राम रूठ गया है, जिससे एक-एक कर पांच बच्चे चले गए हैं। परिवार का सबसे छोटा लाडला हरीश भी भगवान को प्यारा हो गया है। अब परिवार में एक बेटी और एक बेटा ही बचा है।


नहाकर कमरे में गया तो पीछे से मासूम मुंह के बल गिर गया बाल्टी में
हिम्मताराम ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति दयनीय है और वह मजदूरी कर परिवार का पेट भरता है। बुधवार सुबह नहाने के लिए 20 लीटर की प्लास्टिक बाल्टी में पानी भरकर लाया था। उस समय मासूम हरीश पास में ही खेल रहा था। वह नहाकर अंदर कपड़े पहनने चला गया और उसकी पत्नी शारदा रसोई में खाना बना रही थी। इस दौरान मासूम हरीश खेलता-खेलता पानी की बाल्टी के पास पहुंच गया और मुंह के बल बाल्टी में गिर गया। करीब 20 मिनट बाद वह उनको दिखाई नहीं दिया, तो ढूंढते हुए बाल्टी के पास पहुंचे। तब हरीश अंदर बाल्टी में बेहोश पड़ा था। उसने तुरंत भतीजे श्रवण को आवाज लगाकर बुलाया और तुरंत गाड़ी से लेकर नोखा जिला अस्पताल में पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना पर सीआइ ईश्वर प्रसाद जांगिड़ भी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। बाद में अस्पताल पहुंचकर पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुुपुर्द किया।


सात में से पांच बच्चों की असामयिक मौत
हिम्मताराम ने बताया कि उसकी शादी करीब 17 साल पहले हुई थी। उसके सात संतान में से एक-एक कर पांच बच्चे खत्म हो गए हैं। अब बेटी प्रियंका (15) और बेटा राजेश (10) रहे हैं। इससे पहले पत्नी के गर्भवती होने के दौरान एक शिशु गर्भ में खत्म हो गया। तीन बच्चों की पैदा होने के चंद दिनों बाद ही निमोनिया से मौत हो गई। सबसे छोटा मासूम हरीश बुधवार को पानी की बाल्टी में डूबने से खत्म हो गया। मासूम हरीश परिवार में सबसे छोटा व चंचल होने के कारण ज्यादा लाडला था। परिवार के सभी लोग उसे खूब लाड-चाव से रखते थे। दिवाली पर ही वह दो साल का हुआ था। उसकी मौत होने के बाद परिवार में सभी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।



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