चार दिवसीय छठ महापर्व की पूर्णाहुति सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने व व्रती पुरुषों व महिलाओं की ओर से व्रत खोलने के साथ हुई। शहर के विभिन्न तालाबों के घाट पर सूर्योदय से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोगों के पहुंचने का क्रम शुरु हो गया। सूर्योदय के साथ ही व्रती महिलाओं व पुरुषों ने पारम्परिक पूजन सामग्री, फल, थेकुआ, कसार, नारियल, गन्ना, मूली, सेव आदि को बांस की सूप में रखकर व पूर्व की ओर मुंख कर भगवान सूर्य को जल अथवा दूध से अर्घ्य देकर मनोकामनाएं की।
व्रती के सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर परिवार के सदस्यों ने भी भगवान सूरज को जल से अर्घ्य दिया व सुख समृद्धि की कामना की। श्री सरस्वती पूजा समिति के सचिव डॉ. आर पी सिंह के अनुसार इस दौरान व्रती महिलाओं ने पहले घाट पर उपिस्थत लोगों को प्रसाद का वितरण किया व बाद में स्वयं प्रसाद ग्रहण किया। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान पूर्वांचल व बिहारी निवासी परिवारों की महिलाएं व बालिकाएं पारम्परिक वस्त्र आभूषणों से श्रृंगारित होकर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पहुंची। तालाबों के घाटों पर महापर्व छठ के दौरान उगते सूरज को अर्घ्य देने के दौरान विशेष रौनक तथा श्रद्धा व आस्था का माहौल रहा। देवीकुण्ड सागर, धरणीधर तालाब, भादाणी तलाई परिसर, सूरसागर तालाब के पास, गोपेश्वर बस्ती सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में व्रती पुरुषों व महिलाओं ने उगते सूरज को अर्घ्य दिया व व्रत खोला। इसे परना भी कहा जाता है। नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का आगाज हुआ था। घर-घर में पूजा-अर्चना, छठी मइयां के गीत, भजनों का गायन हुआ।
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