चोरों के निशाने पर चार पहिया

जनसंख्या बढ़ोतरी के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ रही हैं। यही वजह है कि न सिर्फ दुपहिया बल्कि चार पहिया वाहनों की संख्या में दिनों-दिन वृद्धि हो रही है। इन वाहनों को खड़ा करने के लिए घरों में जगह कम पड़ने लगी है। मजबूरन चार पहिया वाहन घरों के बाहर खड़े करने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि चोर गिरोह बड़ी आसानी से चार पहिया वाहन चुरा रहे हैं। सार्वजनिक स्थान पर बगैर पार्किंग में खड़े वाहन भी सुरक्षित नहीं हैं। यही वजह है कि पुलिस कमिश्नरेट जोधपुर में बीते साल हर माह 43 लाख रुपए के वाहन चोरी किए गए थे। वहीं, चालू वर्ष में भी हर महीने चालीस लाख रुपए के वाहन चोरों के हाथ लग रहे हैं।

चोरी के चार पहिया वाहनों का तस्करी में इस्तेमाल

बरसों से यह आशंका बलवती हो चुकी है कि सार्वजनिक स्थान या बगैर पार्किंग में दुपहिया वाहन खड़े करना खतरे से भरा है। अब कुछ समय यह धारणा चार पहिया वाहनों के संबंध में भी होने लगी है। चोरी के चार पहिया वाहनों का दुरुपयोग शराब और मादक पदार्थ तस्करी में किया जा रहा है।

नाकाबंदी के बावजूद पकड़ से दूर

जिले में कोई भी वाहन चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस वायरलैस सैट के मार्फत संदेश प्रसारित कर वाहन नम्बर व कम्पनी-रंग के आधार पर नाकाबंदी कराती है। अधिकांश वारदातों में चोरी के वाहन के साथ चोर पकड़ में नहीं आते हैं। वे आसानी से जिले से बाहर निकल जाते हैं।

बचाव : वाहनों में लगवाएं जीपीएस सिस्टम

● वाहनों को चोरियों से बचाने के लिए प्रत्येक वाहन में जीपीएस सिस्टम अवश्य लगा होना चाहिए। यह जीपीएस गोपनीय जगह लगवाएं। ताकि चोरी होने पर उसकी लोकेशन आसानी से मिल जाए।

● वाहन खड़े करने वाले स्थान के आस-पास उच्च क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए। ताकि चोरों के सुराग मिल सकें और पुलिस उन्हें पकड़ ले।

● चार पहिया वाहनों में फास्टैग अवश्यक हों। ताकि चोर गिरोह यदि किसी टोल से क्रॉस हों तो फास्टैग से टोल कट जाए और मालिक को एसएमएस के जरिए क्लू मिल सके।



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