बीकानेर. सीमावर्ती बीकानेर जिले के एक गांव से एक महिला चार माह पहले लापता हो गई। परिजनों ने नाल व राजलदेसर दोनों थानों में गुमशुदगी दर्ज करवाई। पुलिस तो टालमटोल करती रही, लेकिन परिजन और समाजसेवी लोगों ने करीब चार महीने की मशक्कत के बाद महिला को बाड़मेर में खोज निकाला। वे वहां पहुंचे तब तक महिला को ले जाने वाले को भनक लग गई। वह रातोरात महिला को लेकर छतरगढ़ आ गया। परिजन व समाजसेवी भी उसका पीछा करते हुए छतरगढ़ पहुंचे और एक ढाणी से महिला को दस्तयाब कर लिया। गुरुवार रात वे उसे जयमलसर गांव लेकर पहुंचे। महिला के माता-पिता ने जब अपनी बेटी को देखा तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
प्रकरण के अनुसार 17 जुलाई 2022 को गांव में अपने पिता के पास रह रही विवाहिता अपनी चार वर्षीय बच्ची को लेकर ससुराल जाने का कह कर निकली थी। जो संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। गुमशुदा महिला की बहन के मुताबिक उसकी बहन थोड़ी भोली है। इसलिए वह अपने पिता के पास ही रहती है। परिजनों ने तलाश की लेकिन वह नहीं मिली, तब नाल थाने में गुमशुदगी दर्ज करवा दी। परिजन रोज पुलिस के चक्कर निकालते रहे। पुलिस टालमटोल करती रही। आखिरकार परिजन जीवनदायिनी ब्लड सेवा समिति के संस्थापक व मारवाड़ जनसेवा समिति के हरिकिशन सिंह राजपुरोहित से मिले और उन्हें आपबीती बताई। इसके बाद दोनों समितियों के पदाधिकारियों ने स्वयं के खर्चे पर गाड़ी की व्यवस्था कर महिला को सांचौर, बालोतरा, नागौर व धोरीमन्ना तथा बाड़मेर में जगह-जगह तलाश किया। करीब एक महीने की मेहनत के बाद महिला को तलाश किया जा सका।
सीमेंट फैक्ट्री में कराने लगा मजदूरी
महिला के परिजनों के मुताबिक जो व्यक्ति उसे ले गया था, वह बहुत शातिर है। उसने महिला को धोरीमन्ना व बाड़मेर में सीमेंट फैक्ट्री में मजदूरी पर लगा दिया। किसी को उस पर शक न हो, इसलिए उसे अपनी पत्नी बताया। वह बार-बार जगह बदल कर रह रहा था। समिति के विनोद डारा के मुताबिक महिला की फोटो सोशल मीडिया पर डाली। जिससे उनके किसी परिचित ने बताया कि यह महिला बाड़मेर व धोरीमन्ना क्षेत्र में देखी गई है। तब वहां पर गाड़ी भेजकर उसकी तलाश की गई।
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