वॉशिंगटन. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चंद्र मिशन का काउंटडाउन 13 नवंबर को शुरू होगा। उसका अब तक का सबसे बड़ा रॉकेट उड़ान भरने के लिए लॉन्च पैड पर पहुंच गया है। कई तकनीकी और मौसम संबंधी दिक्कतों का सामना करने के बाद अगर सब कुछ ठीक रहा तो 14 नवंबर को बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-1 चंद्रमा मिशन की लॉन्चिंग होगी।
तूफान इयान और बिगड़े मौसम की वजह से पैदा हुए खतरे को देखते हुए नासा को 29 अगस्त और 3 सितंबर के दो प्रक्षेपण प्रयासों को रोकना पड़ा था। पिछले महीने विशाल रॉकेट को वापस उसके हैंगर में भेेज दिया गया था। आर्टेमिस-1 मिशन में विशाल स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान शामिल है। फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर से इसे नासा के वाहन असेंबली बिल्डिंग (वीएबी) से पैड 39-बी की तरफ ले जाया गया। नासा ने एक बयान में लॉन्चिंग की नई तारीख की घोषणा करते हुए बताया कि लॉन्च पैड पर मानक रख-रखाव किया जाना है। साथ ही उपग्रह पेलोड और उड़ान-समाप्ति प्रणाली को लेकर काम किया जा रहा है।
लागत बढ़ गई
नासा के इस रॉकेट सिस्टम को बनाने में एसएलएस, बोइंग कंपनी और लॉकही मार्टिन कॉर्प ने मिलकर काम किया। इसे बनाने में अरबों डॉलर खर्च हुए। लॉन्चिंग में देरी ने इसकी लागत और बढ़ा दी है। नासा को उलटी गिनती की गणना फिर से करनी पड़ी।
अपोलो की जुड़वां बहन आर्टिमेस...
आर्टेमिस-1 नासा के अपोलो मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम के बाद सबसे प्रमुख मिशन है। यह चंद्रमा के लिए मानवरहित परीक्षण उड़ान होगी। ओरियन कैप्सूल को चांद की सतह पर उतारेगा। प्राचीन ग्रीक पौराणिक कथाओं के मुताबिक आर्टिमेस देवी अपोलो की जुड़वां बहन थी। दोनों ग्रीक देवता ज्यूस की बेटियां थीं।
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