केंद्र से अनुदान उठाने में प्रदेश टॉप पर, मिलावट से जंग में फिसड्डी

-आशीष जोशी

शुद्ध के लिए युद्ध में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल आया है। यहां पिछले चार सालों में मिलावट के खिलाफ जंग में न केवल सबसे ज्यादा कार्रवाई की गई, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने में भी यूपी आगे है। राजस्थान की स्थिति यह है कि खाद्य जांच प्रयोगशालाओं के सुदृढीकरण और विकास के लिए पिछले छह साल में केंद्र से सबसे ज्यादा अनुदान उठाने के बावजूद प्रदेश सैम्पल लेने तक में फिसड्डी रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मिलावटियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तो दूर, प्रदेश में पिछले वर्षों में यूपी की तुलना में एक तिहाई नमूने भी नहीं लिए गए। जबकि प्रदेश में हर तीसरा-चौथा नमूना अमानक मिल रहा है। दरअसल, राज्य में मिलावट के खिलाफ जंग वर्षभर नहीं चलती, त्योहारी सीजन में ही पूरा अमला जागता है। इस बार तो दिवाली से ऐन पहले 17 अक्टूबर को विशेष अभियान शुरू किया गया।

जानलेवा मिलावट पर जेल के गिने-चुने मामले

प्रदेश में जानलेवा मिलावट पर मिलावटखोरों को सलाखों के पीछे भेजने के गिने-चुने मामले ही हैं। यहां अधिकांश मामलों में जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया जाता है। जबकि पिछले चार सालों में एक हजार से अधिक नमूने जानलेवा (अनसेफ) मिले हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) को राज्य की ओर से भेजी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक एक भी आपराधिक मामले में आरोपी को दोष सिद्ध नहीं किया जा सका। जबकि इस दौरान यूपी में ऐसे मामलों की संख्या 215, दिल्ली में 130, तमिलनाडु में 600, महाराष्ट्र में 220 और पंजाब में 40 रही।

आंकड़ों का आईना : सैम्पल लेने में ही हम पीछे

राज्य - नमूनों की वर्षवार संख्या

2017-18 - 2018-19 - 2019-20 - 2020-21

उत्तरप्रदेश - 19063 - 22583 - 21193 - 20613

गुजरात - 9576 - 9884 - 13160 - 13284

पंजाब - 11057 - 11920 - 7053 - 6721

तमिलनाडु - 7383 - 5730 - 10528 - 10766

मध्यप्रदेश - 6270 - 7063 - 15717 - 10886

राजस्थान - 3549 - 5760 - 6455 - 7343

लैब विकास के लिए अनुदान लेने में गुजरात-राजस्थान अव्वल

राज्य - अनुदान

गुजरात - 2138.20

राजस्थान - 2092.00

केरल - 1982.50

तमिलाडु - 1647.00

कर्नाटक - 1580.75

हरियाणा - 1458.82

(केंद्रीय क्षेत्र स्कीम में राज्य खाद्य जांच प्रयोगशालाओं के सुदृढीकरण-उन्नयन के लिए वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक दी गई अनुदान राशि लाखों में)

जिम्मेदार बोले...अब सुधर रही स्थिति

प्रदेश में पिछले वर्ष तक खाद्य पदार्थों के नमूने लेने का काम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन ही होता था। इस साल एक जनवरी से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय बनने के बाद शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में तेजी आई है। इस साल अब तक करीब साढ़े बारह हजार नमूने लिए जा चुके हैं।

- डॉ. सीएल मीणा, जॉइंट कमिश्नर, फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल



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