जयप्रकाश गहलोत/बीकानेर. साल के अंतिम माह में पुलिस महकमा पुराने मामलों का निस्तारण करने में लगा है। थाने में पहुंचने वाले फरियादियों से दूरियां बनाई जा रही हैं, ताकि पेंडेंसी कम से कम हो। पुलिस मुख्यालय एवं उच्चाधिकारी संबंधित थानाधिकारियों को पेंडेंसी कम करने के निर्देश दे रहे हैं। थाना पुलिस साल के अंतिम दिनों में कम से कम मुकदमे दर्ज कर इसको कम करने एवं पुराने मामलों का निस्तारण करने में लगी हुई है। इन दिनों थाने में बेहद जरूरी व जिन पर किसी तरह का विवाद होने का डर हो, वहीं मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
चार साल में 27 हजार 456 मुकदमे दर्ज
जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार साल में बीकानेर जिले में 27 हजार 456 मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज हुए, जिनमें से 20.54 प्रतिशत मामले पेंडिंग (लंबित) हैं। वहीं बीकानेर जिले में वर्ष 2022 में अब तक 7180 मुकदमे दर्ज हुए, जिसमें से 79.46 प्रतिशत मामलों का निस्तारण किया जा चुका हैं। शेष 20.54 प्रतिशत मामलों में से भी 31 दिसंबर तक पांच से सात प्रतिशत और मुकदमों का निस्तारण कर लिया जाएगा।
पेंडेंसी का प्रतिशत तय
पुलिस मुख्यालय की ओर से थानों में दर्ज पेंडेंसी पांच प्रतिशत निर्धारित की हुई है, जबकि थानों में पेंडेंसी 13 से 15 प्रतिशत तक चल रही है। तय पांच प्रतिशत पेंडेंसी में 173 (8) सीआरपीसी, 211 दंड प्रक्रिया संहिता, कोर्ट से लोटाई गई पत्रावलियां भी शामिल हैं।
एक नजर में
- थाने - 28- मुकदमे - 7180
- निस्तारण - 5705- पेंडिंग - 1475
- पेंडेंसी प्रतिशत - 20.54
इनका कहना है...
पेंडेंसी को लेकर पुलिस अलर्ट नहीं है। पुलिस साल के अंतिम दिनों में पेंडेंसी कम दर्शाती है। कोर्ट में अवकाश होने के कारण मामले कोर्ट पहुंचते ही नहीं हैं, लेकिन पुलिस कई मामलों की फाइलों में उच्चाधिकारियों के कोर्ट में पेश होने के आदेश होने को ही पेंडेंसी निस्तारण में दर्शाती है ,जबकि नियम यह है कि जब तक फाइल कोर्ट में नहीं चली जाती, तब तक पेंडिंग ही रहती है। पुलिस मुख्यालय को निस्तारण की सीमा तय नहीं करके फाइलों के निस्तारण की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ताकि अपराधियों को सजा मिल सके।
- ओमप्रकाश, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सेवानिवृत आरपीएस
इनका कहना है...
थानों में मुकदमे दर्ज होते हैं और उनका उचित निस्तारण किया जाता है। ऐसा नहीं है कि साल के अंतिम दिन में आधी-अधूरी जाचं करके मामलों का निस्तारण करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जांच की गुणवत्ता संबंधी किसी सूरत में समझौता नहीं हो सकता। पुलिस अपना काम कर रही है। मामले दर्ज करना और निस्तारण करना एक रुटीन प्रक्रिया है। फिलहाल इस साल दर्ज मामलों में 20.54 प्रतिशत ही पेंडिंग हैं।
योगेश यादव, पुलिस अधीक्षक
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