संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. प्रदेश में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का सिलसिला चल रहा है। वैसे ही श्रीडूंगरगढ़ में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का गोरखधंधा उजागर होने और जिम्मेदारों के बात पहुंचाने के बाद भी फर्जी जन्म प्रमाण बनाने का सिलसिला जारी है।
नियम व कानून कायदों को धत्ता बताते हुए कुछ लोग बेखौफ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं और बदले में लोगों से मुंहमांगी रकम भी ऐंठ रहे है। हैरानी कि बात तो ये कि बार-बार ऐसे फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पकड़ में आने के बाद भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी है और इस गोरखधंधे में लिप्त लोग जन्म का प्रमाण दुकानों में बेच रहे हैं। अब ताजा मामला धर्मास ग्राम पंचायत के एक व्यक्ति का फर्जी जन्म प्रमाण जारी होने का सामने आया है। जब धर्मास ग्राम विकास अधिकारी के पास किसी संशोधन के लिए ये प्रमाण पत्र आया तो पता चला कि प्रमाण पत्र फर्जी है।
पत्रिका ने खोली थी गोरखधंधे की पोल
फर्जी जन्म प्रमाण के गोरखधंधे की पोल राजस्थान पत्रिका ने खोली थी। पत्रिका ने गत 16 सितम्बर के अंक में दुकानों पर बिक रहा जन्म का प्रमाण शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर इस फर्जीवाड़े को उजागर किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद रस्म अदायगी के तौर पर एक बार आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की टीम भी श्रीडूंगरगढ़ पहुंची। टीम की ओर से कार्रवाई करने की बात कह कर ओर कागजी खानापूर्ति करके मामले में इतिश्री कर ली गई, लेकिन फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का खेल अनवरत जारी है।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र दंडनीय अपराध
जानकारी के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र एक वैधानिक दस्तावेज है जो सम्बन्धित रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) की ओर से ही जारी किया जा सकता है। इसमें परिवर्तन एवं संशोधन का अधिकार भी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को ही है। यदि कोई गलत तरीके से प्रमाण पत्रों के साथ एडिटिंग कर फर्जी प्रमाण पत्र बनाता है तो यह एक दंडनीय अपराध है।
कार्यशैली पर लग रहा सवालिया निशान
क्षेत्र में लगातार फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने मामले सामने आना सम्बंधित विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। जन्म प्रमाण काफी अहम दस्तावेज है। स्कूल में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि में जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, लेकिन फर्जी जन्म प्रमाण जारी करने वालों पर लगाम नहीं लग पाने के कारण फर्जीवाड़े का यह धंधा खूब फल फूल रहा है।
इ-मित्र कियोस्क जारी करते है प्रमाण पत्र
जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र व विवाह पंजीयन कार्य पहचान पोर्टल द्वारा होते हैं, लेकिन इसके लिए इ-मित्र कियोस्क द्वारा ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी द्वारा सत्यापन करने के बाद ऑनलाइन यह प्रमाण बनते हैं, लेकिन फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र जारी करने वाले इ-मित्र कियोस्क इस प्रक्रिया को नहीं अपनाकर एडिटिंग ऐप के जरिए एडिट कर जन्म प्रमाण पत्र प्रार्थी को पकड़ा देते है। नकली जन्म प्रमाण पत्र भी हूबहू असली की तरह ही दिखता है, लेकिन बार कोड, रजिस्ट्रेशन नम्बर और डिजिटल हस्ताक्षर फर्जी होते हैं। साथ ही फाेंट व लोकेशन का भी अंतर होता है। रजिस्ट्रेशन नम्बर व बार कोड के मिलान से ही असली-नकली का पता चलता है।
इनका कहना है
सांख्यिकी विभाग सहित उच्च अधिकारियों को फर्जी जन्म प्रमाण के बारे में अवगत करवा दिया गया है। इस संबंध में सम्बंधित विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है। जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले व्यक्ति जल्दबाजी के चक्कर में ऐसे फर्जीवाड़े करने वालों के चुंगल में नहीं फंसे।
हितेश कुमार, ग्राम विकास अधिकारी धर्मास।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/HryOSht
https://ift.tt/qDNnkWU
إرسال تعليق