जयपुर। प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में चल रहे न्यायिक कर्मचारियों के आंदोलन को अब वकीलों का भी समर्थन मिल रहा है। अधिवक्ताओं ने कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए हाईकोर्ट प्रशासन से मांग की है कि वे जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकाले। ताकि आम लोगों को राहत मिले। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो इस संबंध में जनहित याचिका लगाई जाएगी।
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राजस्थान उच्च न्यायालय के एडवोकेट पूनम चंद भंडारी ने अधिवक्ता डॉक्टर डीएन शर्मा के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को नोटिस दिया है। इसमें कहा गया है कि पिछले 19 दिन से कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। न्याय व्यवस्था ठप्प हो गई है। जनता परेशान है और न्याय से वंचित हो रही है। इसलिए 24 घंटे के अंदर कर्मचारियों की मांग को स्वीकार करें और हड़ताल समाप्त करें। साथ ही कहा कि यदि हड़ताल खत्म नहीं होती है तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
वहीं, एडवोकेट प्रभा अग्रवाल ने चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा है कि पूरे देश के न्यायालयों की कार्य प्रणाली उनके अधीन है। राजस्थान में लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। अदालतों में काम नहीं होने से पूरी न्याय व्यवस्था चरमरा गई है। पत्र में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि एफआईआर दर्ज नहीं करना किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन करना है। ऐसे में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है।
जेल में बंद निर्दोष लोगों की नहीं हो रही सुनवाई
एडवोकेट भंडारी ने कहा कि न्यायिक कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण न्यायिक कार्य ठप्प पड़ा है। अदालतें मुकदमों में कॉमन डेट दे रही है। जिसके चलते न्यायालय में विचाराधीन लाखों मुकदमों में किसी भी प्रकार की प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पा रही है। निर्दोष लोग जो जेल में बंद है, उनकी भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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