2021 में हर 4.4 सेकंड में हुई एक बच्चे या युवा की मौत

न्यूयॉर्क. शिशु मृत्यु दर अनुमान के लिए संयुक्त राष्ट्र इंटर-एजेंसी ग्रुप (यूएन आइजीएमई) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में 50 लाख बच्चे अपने पांचवें जन्मदिन से पहले ही काल के ग्रास में समा गए, जबकि 5-24 वर्ष की आयु के 21 लाख बच्चों और युवाओं की सांसें थम गईं। इस तरह हर 4.4 सेकंड में एक बच्चे या युवा की मृत्यु हुई। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इसी अवधि के दौरान दुनियाभर में 19 लाख शिशु मृत पैदा हुए।

अफ्रीका सबसे खराब क्षेत्र
रिपोर्ट में चेताया गया कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो लगभग 5.9 करोड़ बच्चे और युवा 2030 से पहले मर जाएंगे, जबकि मृत पैदा होने वाले बच्चों का आंकड़ा लगभग 1.6 करोड़ होगा। विश्वभर में शिशु मृत्यु दर में व्यापक असमानता है। उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया ऐसे क्षेत्र हैं, जहां शिशु मृत्यु दर दुनिया के बाकी हिस्सों से ज्यादा है। उप-सहारा अफ्रीका में जन्मे बच्चों के लिए यह जोखिम यूरोप और उत्तरी अमरीकी बच्चों की तुलना में 15 गुना अधिक है।

इस सदी में आई मृत्यु दर में गिरावट
वैश्विक स्तर पर वर्ष 2000 के बाद से सभी आयु वर्ग में मृत्यु का जोखिम घटा है। इस सदी की शुरुआत के बाद से दुनियाभर में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 50 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इससे बड़े बच्चों और युवाओं के संबंध में यह आंकड़ा 36% है। वहीं स्टिलबर्थ (22 या उससे अधिक हफ्तों में गर्भस्थ शिशु में जीवन का कोई संकेत न होना) में 35 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसा महिलाओं, बच्चों और युवाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार की वजह से हुआ है।

भारत में Stillbirth में होता गया सुधार
दुनियाभर में वर्ष 2021 में मृत पैदा हुए हर तीन बच्चों में से एक का जन्म भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया में से किसी एक देश में हुआ। हालांकि वर्ष 2000 के बाद से कुल 21 देशों ने इस स्थिति में सुधार किया है, जिनमें भारत भी शामिल है। वर्ष 2000 में भारत में स्टिलबर्थ (Stillbirth) का आंकड़ा 8,78,690 था। वर्ष 2010 में यह घटकर 5,67,367 और 2021 में 2,86,482 तक आ गया।



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