बाकानेर में चिकित्सा सेवा के हालात पुराने ढर्रे से निकलने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बरसों पहले भी यहां मरीजों की जांच-पड़ताल के लिए लोगों को भाग कर बीकानेर ही आना पड़ता था और आज भी कमोबेश लगभग पूरे जिले के हालात ऐसे हैं कि सोनोग्राफी जैसी जरूरी जांच भी जिले के अधिकतर हिस्सों में सरकारी अस्पतालों में मौजूद नहीं है। और तो और, जिले के दो मंत्रियों के इलाकों में भी यही हालात हैं, जहां 50 लाख की सोनोग्राफी मशीनें तो मौजूद हैं, लेकिन वह भी कमरों में बंद होकर शोपीस जैसी होकर रह गई हैं। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से इस बारे में फरियाद की, लेकिन सेहत अमला और संबंधित निजाम जैसे आंख-कान मूंदे पड़ा है।
समस्याओं से सामना
ग्रामीण इलाकों में अगर कोई चिकित्सक किसी मरीज को सोनोग्राफी कराने की सलाह देता है, तो उसे इसके लिए बीकानेर आना पड़ता है या फिर बिना जांच कराए ही दवा लेनी होती है। अगर वह बीकानेर आकर जांच कराता है, तो उसे नए सिरे से ओपीडी की पर्ची कटवाने से लेकर सोनोग्राफी की तारीख लेने तक की जद्दोजहद करनी पड़ती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सक की लिखी सोनोग्राफी की जांच यहां किसी सरकारी अस्पताल में मान्य नहीं होती है। अगर यहां जांच करानी होती है, तो उसी अस्पताल की पर्ची होना आवश्यक है। उसके बाद भी सिर्फ आपात स्थिति में ही मरीज की सोनोग्राफी जांच संभव हो पाती है, अन्यथा उसे लंबी तारीखें लेकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
मशीनें हैं, लेकिन...
हालांकि, सरकार ने ग्रामीण इलाकों में कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध करवा रखी है, लेकिन लगभग सभी जगह सोनोलॉजिस्ट के अभाव में यह मशीनें एक कमरे में बंद ही पड़ी हैं। जिले के कोलायत, बज्जू, खाजूवाला, गजनेर, गडियाला तथा देशनोक के स्वास्थ्य केन्द्रों में सोनोग्राफी मशीनें कमरे में रखी हुई हैं, जो मरीजों के लिए शो पीस बनी हुई हैं। यहां पर मरीज मशीन का कक्ष तो देख सकते हैं, लेकिन जांच नहीं करवा सकते हैं।
मंत्रियों के इलाके में ही सोनोलॉजिस्ट नहीं
प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्री भंवरसिंह भाटी और गोविन्दराम मेघवाल के विधानसभा क्षेत्रों में ही सोनोग्राफी जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट नहीं हैं। गत दिनों मेघवाल के अपने क्षेत्र खाजूवाला के दौरे के दौरान उन्हें सोनोलॉस्टि नहीं होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने बातचीत भी की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। गौरतलब है कि बीकानेर से खाजूवाला करीब डेढ़ सौ किलाेमीटर दूर है। बीकानेर-खाजूवाला के बीच ऐसा कोई केन्द्र भी नहीं है, जहां जाकर मरीज जांच करवा सके। यही हालात ऊर्जा मंत्री भंवरसिंह भाटी के विधानसभा क्षेत्र का है।
यह सही है कि सोनोलॉजिस्ट के अभाव में मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा है। पद भरने के लिए सरकार को पत्र भेजा हुआ है। मशीनों के संचालन के लिए अन्य चिकित्सकों की ड्यूटी भी नहीं लगा सकते। देशनोक में कार्यरत चिकित्सक का पीजी में चयन होने के कारण वहां पर भी पद रिक्त हो गया है।
- डॉ. मोहम्मद अबरार पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
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