ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर. एसीबी उदयपुर में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई से चूक गई। जमीन के एक मामले में उप अधीक्षक (सीओ) जितेन्द्र आंचलिया पर गिरफ्तारी की धमकी देकर जमीन का एग्रीमेंट कराने और सुखेर थाने के उपनिरीक्षक रोशन लाल खटीक के खिलाफ एफआर पेश करने के नाम पर दो लाख रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत थी। एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई के लिए जाल बिछाया, लेकिन कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंची। ऐसे में एसीबी ने रोशन लाल के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया है, वहीं जितेन्द्र आंचलिया की भूमिका की विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई गई है।
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यह शिकायत एसीबी की विशेष अनुसंधान इकाई को एक एनआरआई ने दी थी। इसमें बताया कि उसके परिवार ने वर्ष 2007 में भुवाणा में 32000 हजार वर्ग गज जमीन खरीदी थी। इसमें विवाद हो गया था। जमीन उसके भाई की पत्नी अपनी बता रही है, जबकि परिवादी का कहना है कि भाई की मृत्यु हो चुकी है। भाई ने पत्नी के नाम जमीन का कुछ हिस्सा गिफ्ट डीड किया था। वह पूरी जमीन पर दावा कर रही थी। विवाद के बीच 17 फरवरी 22 को परिवादी के यहां पुलिस पहुंची और सुखेर थाने चलने के लिए कहा। अगले दिन पुलिस उप निरीक्षक रोशन लाल परिवादी के अकाउंटेंट को थाने ले गए। परिवादी का आरोप है कि थाने पहुंचा तो वहां भाई की पत्नी, सीओ जितेन्द्र आंचलिया व दो अन्य व्यक्ति थे। पुलिस ने परिवादी का पासपोर्ट जब्त कर थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी। आरोप लगाया कि जमीन का मार्च में जबरन एग्रीमेंट करा लिया। यह भी दावा किया कि समझौतानुमा पत्र खुद आंचलिया ने लिखा।
थानेदार ने एफआर के बदले रिश्वत के मांगे दो लाख
शिकायत में बताया कि जितेन्द्र आंचलिया ने कहा था कि आपके खिलाफ दर्ज मामले में एफआर कोर्ट में भेज दी जाएगी, लेकिन रोशन लाल इसके लिए दो लाख रुपए मांग रहा है। शिकायत के बाद एसीबी ने इसकी तस्दीक शुरू की। 13 नवम्बर को थानेदार परिवादी से सौभाग सर्कल पर मिला। उसने गिफ्ट व रुपए मांगे। इसके बाद दुबारा मुलाकात में घड़ी व कुछ रुपए ले लिए। उसने रिश्वत की रकम को लेकर कहा कि काम होने के बाद। इसके बाद कॉल कर कहा कि गिफ्ट सस्ता है। उसे लौटाने की बात कही। 16 मार्च को दलाल सूर्यप्रकाश का परिवादी के पास कॉल आया। उसने जितेन्द्र आंचलिया से मिलने के लिए होटल ट्यूलिप में बुलाया। वहां परिवादी व आंचलिया के बीच हुई वार्ता भी एसीबी ने रिकॉर्ड कर ली। बात आगे बढ़ती उससे पहले ही एफआर को दूसरे पक्ष ने कोर्ट में चुनौती दे दी। ऐसे में थानेदार ने एसीबी के परिवादी से सम्पर्क बंद कर दिया।
30 दिसम्बर को दर्ज हुआ मामला
ट्रैप सफल नहीं होने पर एसीबी ने रिश्वत की मांग का मामला दर्ज किया है। तस्दीक के दौरान जो रिकाॅर्डिंग की गई, उसके आधार पर एसीबी ने माना कि आरोपी रिश्वत लेने के लिए सहमत था। विशेष अनुसंधान इकाई के निरीक्षक रघुवीर शरण की रिपोर्ट पर 30 दिसम्बर को रोशन लाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसमें लिखा कि जितेन्द्र आंचलिया के विरुद्ध विस्तृत अनुसंधान किया जाना है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/QxD3IkA
https://ift.tt/hHEdSkO
إرسال تعليق