नोखा. अपनों से बिछड़े कोटा निवासी विशाल के लिए शनिवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया और अपना घर आश्रम की बदौलत उसे वापस परिवार मिल गया। सेवा साथी उसे कोटा घर तक पहुंचाने गए। आश्रम पदाधिकारियों ने बताया कि विशाल की मानसिक िस्थति ठीक नहीं होने से वह घर से निकल गया था और लावारिश हालत में मिलने पर उसे कोटा के अपना घर आश्रम में लाकर रखा गया।
यहां से उसे चार महीने पहले नोखा अपना घर आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया। आश्रम में उपचार व सेवा-सुश्रुषा करने पर उसकी मानसिक िस्थति में सुधार हुआ, तो उसके परिजनों के बारे में जानकारी जुटाकर उनको सूचित किया गया। बाद में आश्रम के सेवा साथी विनोद यादव के साथ विशाल को उसके घर कोटा भेजा गया। विशाल और परिजन एक-दूसरे से मिलकर खुश हुए।
सनातन धर्म में सोलह संस्कारों का विशेष महत्व होता
नोखा. कस्बे के शांतिवन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक संत प्रहलाददास ने कहा कि सनातन धर्म के जीवन में सोलह संस्कारों में ब्याह का विशेष महत्व होता है। बालक के माता के गर्भ में प्रवेश करने से लेकर उसकी संसार से अंतिम यात्रा तक सोलह संस्कार हिंदू धर्म में बनाए हैं।
व्यक्ति जीवनकाल में इन संस्कारों से परिपूर्ण होकर मानव संसार रुपी सागर से पार होता है। भगवान की आराधना कर जीवन मरण के चक्र से मुक्ति पाते है। उन्होंने श्रीकृष्ण कथा सहित अन्य कथाओं का वृतांत सुनाया। कथा में मीराबाई की कृष्ण भक्ति की सजीव झांकी सजाई गई। कथा में नरसीराम, बजरंग पालीवाल, गिरधारी पारीक, शिवनारायण झंवर, गिरधारी पारीक सहित कथा प्रेमी मौजूद रहे। रविवार को कथा समापन पर शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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