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{} देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों आईआईटी में चल रही जोसा-काउंसलिंग 2025 के राउंड-2 के आंकड़े देश के तकनीकी भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट को मजबूती देने वाली कोर ब्रांचेज इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग में अब स्टूडेंट्स की रुचि लगातार घट रही है। हालांकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पसंद बनी हुई है, लेकिन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्थिति केवल सम्मानजनक कही जा सकती है। जबकि सिविल इंजीनियरिंग को लेकर विद्यार्थियों की बेरुखी जस की तस बनी हुई है।एक्सपर्ट के अनुसार अगर देश को मेक इन इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट जैसे अभियानों में आगे बढ़ाना है तो कोर ब्रांचेज में टॉप टैलेंट की भागीदारी जरूरी है। आज की स्थिति में टॉप रैंकर्स का कोर ब्रांचेज की तरफ रुझान नहीं होना आने वाले समय में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए खतरे की घंटी है।देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों आईआईटी में चल रही जोसा-काउंसलिंग 2025 के राउंड-2 के आंकड़े देश के तकनीकी भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट को मजबूती देने वाली कोर ब्रांचेज इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग में अब स्टूडेंट्स की रुचि लगातार घट रही है। हालांकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पसंद बनी हुई है, लेकिन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्थिति केवल सम्मानजनक कही जा सकती है। जबकि सिविल इंजीनियरिंग को लेकर विद्यार्थियों की बेरुखी जस की तस बनी हुई है।एक्सपर्ट के अनुसार अगर देश को मेक इन इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट जैसे अभियानों में आगे बढ़ाना है तो कोर ब्रांचेज में टॉप टैलेंट की भागीदारी जरूरी है। आज की स्थिति में टॉप रैंकर्स का कोर ब्रांचेज की तरफ रुझान नहीं होना आने वाले समय में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए खतरे की घंटी है।2025-06-26T13:55:22.000Z fromJoSAA Counselling 2025 : इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग बनी पहली पसंद, सिविल से अब भी दूरी
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों आईआईटी में चल रही जोसा-काउंसलिंग 2025 के राउंड-2 के आंकड़े देश के तकनीकी भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट को मजबूती देने वाली कोर ब्रांचेज इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग में अब स्टूडेंट्स की रुचि लगातार घट रही है। हालांकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पसंद बनी हुई है, लेकिन मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्थिति केवल सम्मानजनक कही जा सकती है। जबकि सिविल इंजीनियरिंग को लेकर विद्यार्थियों की बेरुखी जस की तस बनी हुई है।एक्सपर्ट के अनुसार अगर देश को मेक इन इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट जैसे अभियानों में आगे बढ़ाना है तो कोर ब्रांचेज में टॉप टैलेंट की भागीदारी जरूरी है। आज की स्थिति में टॉप रैंकर्स का कोर ब्रांचेज की तरफ रुझान नहीं होना आने वाले समय में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए खतरे की घंटी है।
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